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Train Washroom Rule: भूलकर भी इस समय न करें ट्रेन के टॉयलेट का इस्तेमाल, वरना सफर में होगी बड़ी दिक्कत
Train Me Washroom Kab Use Nahi Karna Chahiye: भारतीय रेलवे में हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं। दूर-दराज के गांव जाना हो या फिर एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रेन एक ऐसा साधन है जो बजट में होता है और आसानी से आपको आपके डेस्टिनेशन पर पहुंचा देता है। लेकिन ट्रेन के वॉशरूम से जुड़े कुछ बेहद जरूरी नियम आज भी ज्यादातर यात्रियों को पता नहीं होते। खासकर कई लोग ट्रेन के स्टेशन पर रुकते ही तुरंत टॉयलेट इस्तेमाल करने चले जाते हैं, जबकि रेलवे के अनुसार यह आदत कई बार परेशानी और जुर्माने की वजह भी बन सकती है। अगर आप भी ट्रेन का सफर करते हैं और रेल के रुकते ही वॉशरुम जाते हैं तो आज का आर्टिकल आपके लिए ही है। दरअसल, रेल में सफर करते समय कई नियमों का पालन करना चाहिए जिसने बारे में सभी को पता होना चाहिए। चलिए जानते हैं कि ट्रेन में सफर करते समय कब वॉशरूम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? साथ ही रेलवे से जुड़े कई सारे नियम...

स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में टॉयलेट इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
क्या आप जानते हैं कि भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, जब ट्रेन स्टेशन पर खड़ी हो, खासकर लंबे स्टॉपेज के दौरान, तब यात्रियों को टॉयलेट इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। पुराने पारंपरिक टॉयलेट सिस्टम में मल सीधे रेलवे ट्रैक पर गिरता था, जिससे प्लेटफॉर्म और ट्रैक पर गंदगी फैलती थी। इससे सफाई कर्मचारियों को काफी परेशानी होती थी और यात्रियों को भी बदबू का सामना करना पड़ता था। इसी वजह से रेलवे ने लोगों से स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होने के दौरान वॉशरूम इस्तेमाल न करने की अपील की थी।
क्या बायो-टॉयलेट में भी यही नियम लागू होता है?
अब ज्यादातर ट्रेनों में बायो-टॉयलेट लगाए जा चुके हैं, जिनमें वेस्ट सीधे ट्रैक पर नहीं गिरता बल्कि बैक्टीरिया की मदद से ट्रीट होता है। इसके बावजूद रेलवे सलाह देता है कि स्टेशन पर ट्रेन खड़ी होने के दौरान जरूरत न हो तो वॉशरूम इस्तेमाल करने से बचें। कई बार लंबे समय तक ट्रेन खड़ी रहने पर सिस्टम ब्लॉक होने या बदबू की समस्या बढ़ सकती है। साथ ही सफाई कर्मचारी भी उस दौरान टॉयलेट एरिया की सफाई करते हैं।
ट्रेन चलने के दौरान टॉयलेट इस्तेमाल करना क्यों बेहतर माना जाता है?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन के चलने के दौरान वॉशरूम सिस्टम ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है। बायो-टॉयलेट का फ्लश और डिस्पोजल सिस्टम ट्रेन की मूवमेंट के दौरान अधिक प्रभावी रहता है। इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि ट्रेन स्टेशन छोड़ने के बाद ही वॉशरूम इस्तेमाल करें।
रेलवे के बायो-टॉयलेट से जुड़े जरूरी नियम
टॉयलेट में प्लास्टिक या बोतल न डालें
पानी का सीमित इस्तेमाल करें
फ्लश के बाद टॉयलेट साफ रखें
ट्रेन स्टेशन पर रुकी हो तो जरूरत न हो तो वॉशरूम यूज न करें
बच्चों को भी रेलवे के नियम समझाएं
पानी और साफ-सफाई का ध्यान रखें
वॉशरूम इस्तेमाल के बाद फ्लश जरूर करें
स्टेशन पर वॉशरूम यूज करने पर क्या हो सकती है दिक्कत?
अगर ट्रेन लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर खड़ी हो और यात्री लगातार टॉयलेट इस्तेमाल करते रहें, तो बदबू, पानी खत्म होने और सिस्टम जाम जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कई बार रेलवे कर्मचारी यात्रियों को ऐसा करने से रोकते भी हैं। यही वजह है कि रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रुकते ही तुरंत वॉशरूम जाने से बचने की सलाह देता है।
तकनीकी रूप से हाँ, क्योंकि बायो-टॉयलेट का वेस्ट सीधे पटरियों पर नहीं गिरता। लेकिन रेलवे प्रशासन फिर भी सलाह देता है कि स्टेशन पर लंबे स्टॉपेज के दौरान इसका उपयोग करने से बचें, क्योंकि ट्रेन खड़ी रहने पर वेंटिलेशन कम होने से कोच में बदबू फैल सकती है और सिस्टम ब्लॉक होने का खतरा रहता है।
वंदे भारत और तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में वैक्यूम आधारित बायो-टॉयलेट (Vacuum Bio-Toilets) होते हैं। ये हवाई जहाज की तरह काम करते हैं। इनमें स्टेशन पर इस्तेमाल की पूरी छूट होती है, लेकिन यात्रियों को ध्यान रखना चाहिए कि वे इनमें कोई भी कचरा या प्लास्टिक न फेंकें, क्योंकि ये बहुत जल्दी चोक (जाम) हो जाते हैं।
जब ट्रेन चलती है, तो उसका फ्लश और एयर-वेंटिलेशन सिस्टम (हवा का दबाव) ज्यादा प्रभावी ढंग से काम करता है। बायो-टॉयलेट के टैंक में मौजूद बैक्टीरिया भी ट्रेन की मूवमेंट के साथ वेस्ट को बेहतर तरीके से डीकंपोज (Treat) कर पाते हैं।



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