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विषमुक्ति वाला स्नान कैसे करें?
स्नान के माध्यम से अपने शरीर को विषरहित करना एक ऐसा प्राचीन उपाय है जिसे आप अपने घर में भी आराम से कर सकते हैं। विष विज्ञान के तहत, आपकी त्वचा को तीसरे गुर्दे के रूप में जाना जाता है जिससे विषाक्त पदार्थों के रूप में पसीना बाहर आता है।
एक विषमुक्ति स्नान की प्रक्रिया में विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना और शरीर द्वारा पानी में उपस्थित खनिज और पोषक तत्वों को अवशोषित करना है। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया से आप तरो-ताजा और जागृत महसूस करेंगें।

ऐसे ले विषरहित स्नान-
1. ऐसे स्नान के लिये आप के पास कम से कम 40 मिनट का समय हो। पहले 20 मिनट के दौरान अपने शरीर विष पदार्थों को निकालने के लिए तथा बाद के 20 मिनट के दौरान पानी के खनिजों को अवशोषित करने के लिए रहने चाहिये।
2. अपने टब को आरामदायक गर्म पानी से भरें। यदि संभव हो तो एक क्लोरीन फिल्टर का प्रयोग करें।
3. टब में एप्सम साल्ट (या मैग्नीशियम सल्फेट) डालें। एप्सम साल्ट में भीगने से आपके शरीर का मैग्नीशियम स्तर फिर से ठीक हो जाता है, जो कि तनाव से मुक्ति दिलाता है। सल्फेट विष पदार्थों को बाहर निकालने के साथ-साथ मस्तिष्क और जोड़ों के ऊतकों में प्रोटीन के निर्माण में मदद करता है। चूँकि यह बहुत सस्ता होता है इसलिये इसे आसानी से दवा की दुकान या बागवानी केन्द्र से खरीदा जा सकता है।
4. अब टब में एक से दो कप या उससे अधिक बेकिंग सोडा डालें। इससे त्वचा कोमल होती है।
5. टब में अदरक की चाय डालें। हालांकि यह भाग वैकल्पिक है, लेकिन अदरक गर्मी के स्तर को बढ़ाकर, विष पदार्थों पसीने द्वारा बाहर निकालने में मदद करती है। चूँकि यह शरीर को गर्म कर आपकी त्वचा को कुछ मिनटों के लिए थोड़ा लाल कर देती है, इसलिये इसकी मात्रा सावधानी से डालें।
6. सुगन्धित तेलों को डालें। लैवेंडर और इलंग जैसे कई तेल स्नान को और भी अधिक सुखद और आराम बनाते हैं और चाय की पत्तियों या युकेलिप्टस के तेल विषमुक्ति प्रक्रिया में आपकी सहायता करेगे। एक सामान्य स्नान के लिए लगभग 20 बूँदें पर्याप्त हैं।
7. टब में कम से कम 20 मिनट और ज्यादा से ज्यादा 40 मिनट अवश्य रहें। आपको कुछ ही मिनटों में पसीना होने लगेगा। यदि आपको ज्यादा गर्मी लगे तो टब में ठंडा पानी बढायें।
8. धीरे से और ध्यानपूर्वक टब से बाहर आयें। चूँकि आपका शरीर मेहनत कर रहा था इसलिये आप कमजोरी और शरीर में पानी की कमी महसूस कर सकते हैं। उस पर, लवण टब को फिसलन युक्त कर देते हैं तो सावधानी से खड़े हों।
9. खूब पानी पियें। जब कभी भी आपका शरीर इस प्रकार से विषमुक्त होता है, तो आपको विष पदार्थों को बाहर निकालने की जरूरत होती है। यदि आप ऐसा नहीं करते तो आप बीमार पड़ जायेंगे।
10. स्नान के बाद, हो सकता है आप अपने शरीर को लूफा या ब्रश से रगड़ना चाहें। यह लसीका प्रणाली को जागृत करने में सहायक होता है, जो विष पदार्थों को बाहर करने में मदद करते हैं।
चेतावनियां
- यदि आप गर्भवती हैं या हृदय, गुर्दे या किसी अन्य स्वास्थ्य कारण से प्रभावित हैं तो एक गर्म पानी वाला स्नान या विषमुक्ति वाला स्नान न करें।
- यह लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए ही है और यह निदान, उपचार, या डॉक्टर के किसी सलाह की जगह नहीं ले सकता है। उचित सलाह हेतु पहले अपने डॉक्टर से मिलें।
- पुर्वनिर्धारित चीजों के अलावा अपने स्नान में कोई अन्य जड़ी बूटी डालने से पहले, उनके प्रभावों को समझ लें। कुछ जड़ी बूटियाँ जहरीली हो सकती हैं।



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