El Nino: क्या है एल नीनो, मानसून की बारिश और तापमान पर कैसे असर डालता है? जानिए सब कुछ

El Nino: जून शुरू होने के साथ मौसम में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि एल नीनो सक्रिय होने पर कई इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है और वर्षा के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। इस जलवायु घटना का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में इसके प्रभाव महसूस किए जा सकते हैं। दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिक इस समय प्रशांत महासागर में हो रहे बदलावों पर नजर बनाए हुए हैं।

El Nino

कब तक बन सकता है एल नीनो?

विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र की सतह का बढ़ता तापमान एक मजबूत एल नीनो के विकसित होने का संकेत दे रहा है। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर भारत समेत कई देशों के मौसम पर पड़ सकता है, जिससे गर्मी बढ़ने और मानसून की स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और पर्यावरणीय प्रशासन (NOAA) के मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत के दौरान शक्तिशाली एल नीनो बनने की संभावना भी जताई गई है।

एल नीनो कैसे बनता है?

एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जो प्रशांत महासागर में होने वाले बदलावों से जुड़ी होती है। सामान्य परिस्थितियों में समुद्र के ऊपर चलने वाली ट्रेड विंड्स गर्म पानी को दक्षिण अमेरिका के तट से एशिया और ऑस्ट्रेलिया की ओर धकेलती रहती हैं। इसके कारण पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में ठंडा पानी सतह पर आता रहता है, जबकि पश्चिमी हिस्से में पानी अपेक्षाकृत अधिक गर्म रहता है। हालांकि, हर कुछ वर्षों में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उनका प्रभाव कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गर्म पानी पश्चिम की ओर जाने के बजाय मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में फैलने लगता है। समुद्र के तापमान में होने वाला यही असामान्य बदलाव एल नीनो कहलाता है, जो दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।

भारत के मौसम पर असर क्या पड़ेगा?

एल नीनो के दौरान मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे भारत में बादल कम बनते हैं और बारिश घट सकती है। अप्रैल से जून के बीच साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। इसका असर खासकर उत्तर भारत, मध्य भारत, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में अधिक गर्मी और लू के रूप में दिखाई देता है।

2023 में भी हुई थी घटना

2023 में मजबूत एल नीनो के दौरान भारत के कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। उस समय मानसून भी कमजोर रहा और कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हुई। इससे गर्मी का दौर लंबा चला। यह दिखाता है कि प्रशांत महासागर में होने वाले बदलाव हजारों किलोमीटर दूर भारत के मौसम को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्या इस साल सुपर एल नीनो बन सकता है?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल एल नीनो की स्थिति पर खास नजर रखी जा रही है क्योंकि प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। मध्य प्रशांत महासागर में तापमान सामान्य से लगभग +0।9 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है और समुद्र की सतह के नीचे भी बड़ी मात्रा में गर्म पानी मौजूद है। हालांकि, किसी घटना को "सुपर एल नीनो" तब माना जाता है जब मध्य एवं पूर्वी प्रशांत महासागर में तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बढ़ जाए। इतिहास में 1982-83, 1997-98 और 2015-16 जैसे कुछ ही अवसरों पर सुपर एल नीनो देखा गया है। फिलहाल वैज्ञानिक स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं, लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इस साल निश्चित रूप से सुपर एल नीनो विकसित होगा। यदि ऐसा होता है, तो दुनिया के कई हिस्सों के साथ भारत के मौसम, मानसून और तापमान पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

आग उगलेगी धरती

समुद्र की गहराइयों में जमा असामान्य रूप से गर्म पानी अब सतह की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह गर्म पानी वातावरण के तापमान को और बढ़ा सकता है। पृथ्वी पहले ही ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण लगातार गर्म हो रही है, ऐसे में एल नीन्यो का प्रभाव मौसम को और अधिक चरम बना सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस साल एल नीन्यो ने सुपर एल नीन्यो का रूप ले लिया, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। मानसून कमजोर पड़ सकता है, कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है और सूखे का खतरा बढ़ सकता है। इसके साथ ही हीटवेव की घटनाएं अधिक तीव्र और लंबे समय तक चल सकती हैं। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिम भारत में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, जहां तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। मौसम वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि हालात इसी दिशा में बढ़ते रहे, तो आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों को भीषण गर्मी की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

Story first published: Tuesday, June 2, 2026, 12:05 [IST]
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