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ओरल या फिजीकल सनस्क्रीन – क्या है बेहतर?
इस बात में कोई शक नहीं है कि सूर्य की तेज किरणें हमारी त्वचा के लिए हानिकारक होती हैं। ये त्वचा की गहराई में जाकर उसे नुकसान पहुंचाती हैं और इसकी वजह से गंभीर त्वचा रोग हो सकते हैं। ये ना सिर्फ त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाती है बल्कि स्किन के प्राकृतिक तेल को भी कम करने लगती है। इतना ही नहीं इसकी वजह से त्वचा से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं:
एजिंग के निशान जैसे कि बारीक रेखाएं और झुर्रियां
सनबर्न, टैन और पिगमेंटेशन
रूखी त्वचा
त्वचा की प्राकृतिक कसावट और कोलाजन में कमी आना
गंभीर मामलों में स्किन कैंसर और एक्टिनिक केराटोसिस हो सकता है
त्वचा के संयोजी ऊतकों का क्षतिग्रस्त होना
इसी वजह से सनस्क्रीन प्रोटेक्शन का चलन काफी बढ़ गया है और अब सनस्क्रीन की क्रीम ही नहीं बल्कि खाने वाली दवाएं, पीने वाली सनस्क्रीन, यूवी मॉनिटरिंग ब्रेसलेट, इंजेक्शन और यूवी ट्रेसिंग एप भी आ गई है। इस समय ओरल सनस्क्रीन के खूब चर्चे हो रहे हैं।

फिजीकल सनस्क्रीन
इसमें स्किन पर क्रीम लगाई जाती है और मार्केट में कई ब्रांड्स की सनस्क्रीन मौजूद हैं। आपको अपनी स्किन टाइप और धूप में रहने के समय के अनुसार सनस्क्रीन का चुनाव करना चाहिए।

फायदा
ये त्वचा तक सूर्य की हानिकारक किरणों को पहुंचने नहीं देती हैं और यूवीए एवं यूवीबी किरणों से स्किन की रक्षा करती हैं।
ये वॉटरप्रूफ होती है और पानी के संपर्क में आने पर भी इनका असर खत्म नहीं होता है।
समय से पहले एजिंग और झाईयों से बचाती है।
आपको हर तीन घंटे में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए।
चूंकि ये त्वचा को पूरी तरह से कवर कर लेती है इसलिए ये त्वचा कैंसर के खतरे को भी कम करती है।
धूप और सूर्य की हानिकारक किरणों से बचने का ये सबसे किफायती तरीका है।
ये सनबर्न, पिगमेंटेशन और टैन से बचाती है।

नुकसान
हर तीन घंटे बाद इसे बार-बार लगाने की जरूरत होती है।
पूरे शरीर पर सनस्क्रीन लगाना मुश्किल होता है इसलिए लोगों को ये काम झंझट भरा लगता है।
कई लोगों को सनस्क्रीन क्रीम लगाना अच्छा नहीं लगता है।
ये सिर्फ उस हिस्से को धूप से बचाती है जहां पर इसे लगाया जाता है।

ओरल सनस्क्रीन
इसमें गोलियों का सेवन किया जाता है। ये गोलियां सूर्य की किरणों से सुरक्षा प्रदान करती हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करते हैं जो कि फ्री रेडिकल्स को रोककर त्वचा की कोशिकाओं की रक्षा करती हैं और सूर्य से होने वाले नुकसान से बचाती हैं।

फायदे
सूर्य की किरणों से बचने का ये बहुत आसान तरीका है।
इससे पूरे शरीर को सुरक्षा मिलती है।
इसे थोड़े-थोड़े समय में बार-बार लगाने की भी जरूरत नहीं है।
छुट्टियों और घूमने के लिए बेहतर विकल्प है।
कई स्टोर्स पर ये आसानी से उपलब्ध है।

नुकसान
ये सनस्क्रीन लोशन के जितनी असरदार नहीं है क्योंकि ये पूरे शरीर पर काम करती है।
सनस्क्रीन लोशन की तुलना में ये बहुत किफायती है।

फिजीकल सनस्क्रीन या ओरल सनस्क्रीन
इस बात में कोई शक नहीं है कि आज के समय में सनस्क्रीन एक जरूरत बन गया है लेकिन आपको अपनी त्वचा की जरूरत के हिसाब से ही सनस्क्रीन चुनना चाहिए। धूप से बचने के लिए फिजीकल सनस्क्रीन सबसे बेहतर हैं लेकिन ओरल सनस्क्रीन भी जरूरी होते हैं और इन्हें बार-बार लगाने की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा ओरल सनस्क्रीन को लगाने का झंझट भी नहीं रहता है।



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