क्यों जलाई जाती है होलिका और क्यों खेलते हैं रंग? जानें होली से जुड़ी 5 अद्भुत और प्राचीन पौराणिक कहानियां

Holi 2026 Significance & History: फागुन मास की पूर्णिमा की ठंडी बयार और हवा में उड़ते अबीर-गुलाल इस बात का संकेत हैं कि खुशियों का त्योहार 'होली' दस्तक दे चुका है। 2 मार्च को होलिका दहन होगा और 4 मार्च को पूरे देश में होली का पर्व मनाया जाएगा। लोग रंगों में सराबोर रहेंगे और मस्ती के रंगों में रंग एक-दूसरे संग खुशियां बाटेंगे। हम और आप हर साल बड़े उत्साह के साथ अपनों को रंग लगाते हैं और पकवानों का आनंद लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस उत्सव की शुरुआत कैसे हुई? दरअसल, हिंदू धर्म में होली का महत्व केवल मौज-मस्ती तक सीमित नहीं है।

यह त्योहार हमारी आस्था, इतिहास और गहरी पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है। वैसे तो कहा जाता है कि हर भारतीय त्योहार के पीछे कोई न कोई बड़ी आध्यात्मिक वजह होती है, लेकिन होली के साथ कई ऐसी रोचक और अलग-अलग पौराणिक कहानियां (Mythological Stories) प्रचलित हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

जहां एक ओर यह भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह भगवान कृष्ण के प्रेम और शिव के वैराग्य से भी जुड़ा है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि आखिर क्यों जलाई जाती है 'होलिका' और क्यों हर साल रंगों के इस महाकुंभ में सराबोर हो जाती है पूरी दुनिया।

Holi

1. भक्त प्रह्लाद और होलिका: 'अधर्म पर धर्म' की जीत की गाथा

यह होली से जुड़ी सबसे प्रमुख कहानी है। दैत्यराज हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। प्रह्लाद को मारने के उद्देश्य से उसकी बुआ 'होलिका' उसे गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, क्योंकि उसे आग से न जलने का वरदान प्राप्त था। लेकिन प्रभु की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की याद में हर साल होलिका दहन किया जाता है।

2. राधा-कृष्ण का दिव्य प्रेम: कैसे शुरू हुई 'रंगों वाली होली'?

मथुरा और वृंदावन की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पौराणिक कथा के अनुसार, बालक कृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर माता यशोदा से शिकायत करते थे। तब माता ने उन्हें राधा के चेहरे पर अपनी पसंद का रंग लगाने का सुझाव दिया। नटखट कृष्ण ने गोपियों के साथ मिलकर रंग खेलना शुरू किया और यही से रंगों वाली होली या 'धुलेंडी' की शुरुआत हुई।

3. भगवान शिव और कामदेव: वासना के अंत की कहानी

दक्षिण भारत में एक प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान शिव गहरी समाधि में थे, तब कामदेव ने उनकी तपस्या भंग करने का प्रयास किया। क्रोधित होकर शिव ने अपनी तीसरी आंख खोली और कामदेव को भस्म कर दिया। बाद में देवी रति के विलाप पर शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित किया। प्रेम के देवता के दोबारा जन्म की खुशी में भी होली मनाई जाती है।

4. राक्षसी 'ढूंढा' का वध

होली को लेकर एक और कहानी प्रचलित है। जान लें कि पौराणिक काल में 'ढूंढा' नामक एक राक्षसी थी जो बच्चों को परेशान करती थी। राजा पृथु के शासनकाल में बच्चों ने एकजुट होकर अपनी निडरता और शोर-शराबे से उस राक्षसी को भगा दिया था। आज भी होली के दिन बच्चों द्वारा किया जाने वाला हुड़दंग और उत्साह इसी कहानी की याद दिलाता है।

5. ऋतु परिवर्तन और नवान्न यज्ञ

पौराणिक मान्यताओं के अलावा, होली 'नवान्न इष्टि' यज्ञ से भी जुड़ी है। प्राचीन काल में नई फसल (होला) के आधे पके हुए अनाज को अग्नि में भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता था। वसंत ऋतु का स्वागत और शीत ऋतु की विदाई के इस वैज्ञानिक परिवर्तन को भी उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

रोचक तथ्य

आपने होली की पौराणिक कथाओं के बारे में तो जान लिया है अब होली के बारे में एक और रोचक तथ्य भी जान लें। दरअसल, 'होली' शब्द संस्कृत के 'होला' से निकला है, जिसका अर्थ होता है 'भुना हुआ अनाज'। प्राचीन समय में इस दिन लोग यज्ञ की अग्नि में जौ और गेहूं की बालियों को भूनकर एक-दूसरे को बांटते थे, जिसे प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माना जाता था। उसी रिवाज को आगे बढ़ाते हुए हर साल होली का त्योहार मनाया जाने लगा।

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