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फाइन लाइन्स को कम करने के लिए इस्तेमाल करें कुमकुमादि तैलम, ये भी होंगे फायदे
आयुर्वेद के ग्रंथों में यूं तो कई सारे तेलों का नाम शामिल है, जो स्किनकेयर में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इन्में कुमकुमादि तैलम या कुंकुंमादि तेल के बारे में बहुत कम लोग जानते है। केरल के परंपरागत स्पा में इस तेल का खासतौर से इस्तेमाल किया जाता है। यहां हम आपको कुंकुंमादि तेल से मिलने वाले फायदों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है।

क्या है कुमकुमादि तेलम
ये तेल मुख्य रूप से तिल से बनाया जाता है। जिसके साथ 20 से 25 तरह की आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है। और चूंकि इसमें केसर का उपयोग किया जाता है। इसलिए इसका नाम कुमकुमादि रखा गया है। दरअसल संस्कृत में केसर को कुमकुम कहा जाता है। केसर के अलावा मंजिष्ठा, चंदन, गुलाब, बहेड़ा, मुलेठी, हरड़ और हल्दी जैसी चीजें भी इसमें मिलाई जाती है। इन सबको मिलाकर इसे तेज धूप में रख दिया जाता है या फिर इसे कई बार बॉयल करके तैयार किया जाता है। भारत के केरल में पारंपरिक औषधियों में इस तेल का उपयोग हजारों साल से मसाज, पंचकर्म और नस्य में किया जाता रहा है।
कुमकुमादि तेलम के फायदे
बढ़ती उम्र का असर करें कम
तनाव, प्रदूषण और हमारी लाइफस्टाइल एंटी एंजिंग के लक्षणों को ट्रिगर करते है। लेकिन बढ़ती उम्र का असर कम करने में कुमकुमादि तेलम आपकी मदद कर सकता है। इसकी प्राकृतिक जड़ी बूटियां स्किन की समस्याओें से निपटने में एक साथ काम करती है। ऐसे में ये तेल आपको यंगर और शाइनिंग स्किन देता है।
मुंहासे घटाए
कई असरकारक आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से भरपूर कुमकुमादि तेलम मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया को मारने में सक्षम है। इसमें मौजूद मजिष्ठा ब्लड और लिम्फेटिक ड्रेन सिस्टम को प्यूरीफाई करने में मदद करता है। कई लोगों को लिम्फेटिक ड्रेन सिस्टम के सही से काम नहीं करने की वजह से मुंहासे की दिक्कत होती है। इसके अलावा, यह मुंहासे को बढ़ाने वाले बैक्टीरिया के विकास को रोकता है, साथ ही यह त्वचा में होने वाले सूजन को कम करने और घाव भरने में तेजी लाता है। वहीं, तेल में मौजूद केसर और वेटिवर स्किकन के पोर्स को बंद करने में मदद करते हैं। तिल का तेल और मुलेठी सेबम (sebum) के स्तर को संतुलित करते हैं। सेबम एक तरह का ऑयल होता है जो मानव शरीर के सेबेसियस ग्लैंड से निकलता है। इससे त्वचा में नमी बनी रहती है।
ग्लोइंग स्किन
कुमकुमादि तेलम में ऐसी कई चीजों का मिश्रण होता है जो डैमेज स्किन को ठीक कर सकता है। साथ ही ये ब्लड सर्कुलेशन को भी बढ़ाता है। जिससे आपकी स्किन पर नेचुरल ग्लो आता है। इसका बेहतर परिणाम पाने के लिए चेहरे पर हल्की मालिश जरूरी होती है।
पोषक तत्वों से भरपूर
कुमकमादि तैलम पोषक तत्वों से भरपूर होता है। जिसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-हाइपरपिग्मेंटेशन, मॉइस्चराइजर, डेमल्सेण्ट, एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी-प्रूरिटिक और नेचुरल सनस्क्रीन के गुण पाए जाते हैं। ये सभी गुण स्किन को धूप-धूल और प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों से बचाने में मदद करते हैं।
सनस्क्रीन के तौर पर आता है काम
कुमकुमादि तैलम, सूरज की तेज धूप और यूवी किरणों से होने वाले बुरे असर से स्किन को बचाता है। इस तेल को बनाने में केसर या फूलों के पराग का इस्तेमाल किया जाता है। इस तेल का बेस आमतौर पर नारियल का तेल होता है। यही वजह है कि ये स्किन पर किसी प्रोटेक्शन लेयर की तरह काम करता है और स्किन को हार्मफुल रे़ज के इफेक्ट से बचाता है। एक रिसर्च के मुताबिक, केसर सूर्य की एल्ट्रावायल्ट रेज़ को एब्जॉर्ब करता है जिससे स्किन सनबर्न के बुरे असर से सुरक्षित रहती है।
नस्य में है फायदेमंद
हजारों सालों से भारत में कुमकुमादि तैलम का उपयोग नस्य और पंचकर्म करने के लिए किया जाता रहा है। इस तेल की कुछ बूंदों को नियमित रूप से नाक में डालने पर हाइपरपिग्मेंटेशन, दाग-धब्बों, झुर्रियों, डार्क सर्कल जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। केरल में तो यहां तक दावा किया जाता है कि कुमकुमादि तैलम से नस्य करने पर सफेद बाल भी काले होने लगते हैं।



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