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मराठी दुल्हन के श्रृंगार के लिए जरुरी हैं ये 8 चीजें
भारत, विविधताओं को देश हैं। हर राज्य में अलग रिवाज से शादी की जाती है और दुल्हा व दुल्हनों का श्रृंगार भी अलग प्रकार से होता है। यहां शादी का मतलब दो लोगों के आपस जुड़ने से नहीं बल्कि पूरे परिवार के मिलन से है।
शायद यही कारण है कि बाहरी देशों में भी भारत में होने वाली शादियों के तरीकों और परम्पराओं को पसंद किया जाता है। आज इस आर्टिकल में हम बात करेंगे मराठी शादियों में सजने वाली दुल्हनों के श्रृंगार की।
मराठी शादी में दुल्हन को विशेष प्रकार से सजाया जाता है। दुल्हन को विशेष तरीके से सिल्क की साड़ी पहनाई जाती है और उनके यहां पहने जाने वाले सोने के गहने भी अलग प्रकार के होते हैं।
अगर आपकी कोई मराठी दोस्त हैं जो अब जल्दी ही शादी करने वाली हैं तो आप वहां अवश्य जाएं। मराठी दुल्हनों के श्रृंगार के लिए निम्न 8 चीजें बेहद आवश्यक होती हैं:

1. सिल्क की साड़ी:
मराठी दुल्हन को सिल्क की साड़ी पहनना अनिवार्य होता है। पीली, लाल या औरेंज कलर की साड़ी को ही प्राथमिकता दी जाती है। मराठी चलन में लाल साड़ी ही पहनने की परम्परा है।

2. चूड़ा:
अन्य प्रांतों में लाल रंग का चूड़ा पहना जाता है लेकिन मराठियों में हरे रंग का चूड़ा पहना जाता है। इसे दुल्हन को अवश्य पहनाया जाता है।

3. नथ:
दुल्हन के श्रृंगार में नथ को सबसे प्रमुख माना जाता है। मराठियों में नथ थोड़े अलग प्रकार की होता है। इस नथ में मोती का काम जरूर होता है।

4. तनमानी:
तनमानी एक प्रकार का मोतियों वाला नेकलेस होता है जिसे शादी के दिन दुल्हन को अवश्य पहनाया जाता है।

5. मुंडावलया:
मुंडावलया, एक ज्वैलरी होती है जो मोतियों से निर्मित होती है। इसे माथे पर पहना जाता है।

6. चांद बिंदी:
मराठियों में चंद्र आकार की बिंदी अवश्य लगाई जाती है। हालांकि, इन दिनों लड़कियां इसे लगाना ज्यादा पसंद नहीं करती हैं।

7. वाकी:
वाकी, भुजाओं पर पहनने वाला गहना होता है। इसे दोनों हाथों की बाजुओं में पहना जाता है। लेकिन इन दिनों लड़कियां इसे एक ही बाजू में पहनती हैं।

8. खोपा:
दुल्हन के बालों का कसकर जूड़ा बना दिया जाता है और उसे विभिन्न प्रकार से सजाकर उसमें खोपा लगाया जाता है। इस प्रकार, इन 8 विशेष आभूषणों से मराठी दुल्हनों को सजाया जाता है।



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