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Holi 2026: होली के सिंथेटिक रंगों से फेफड़ों को हो सकता है गंभीर नुकसान, बरतें ये सावधानियां
Holi 2026: होली खुशियों, रंगों और मेलजोल का त्योहार होता है। इस दिन सभी लोग जमकर रंग-गुलाल खेलते हैं। लेकिन जब हवा में रंगों का महीन पाउडर घुलता है, तो वह केवल चेहरे और कपड़ों तक सीमित नहीं रहता। ये सांस के साथ फेफड़ों तक भी पहुंचता है। दरअसल, बाजार में बिकने वाले कई सिंथेटिक होली के रंगों में भारी धातुएं, इंडस्ट्रियल डाई और केमिकल्स पाए जाते हैं, जो फेफड़ों के लिए खतरनाक समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इसके कारण कई लोगों में खांसी, सांस फूलना, एलर्जी और अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं। ऐसे में, आपको होली खेलते समय थोड़ी सतर्कता बरतनी चाहिए। आइए, गुरुग्राम स्थित नारायणा अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट - पल्मोनोलॉजी, डॉ. पियूष गोयल, , गुड़गांव से विस्तार से जानते हैं होली के रंगों का फेफड़ों और सांस पर क्या असर होता है और किस तरह खेले सुरक्षित होली -

हवा में उड़ते रंग का श्वसन तंत्र पर असर
सूखे गुलाल और अबीर बहुत बारीक कणों से बने होते हैं। ये कण नाक और गले से होते हुए श्वासनलिका और फेफड़ों की छोटी वायुनलिकाओं तक पहुंचते हैं। जब ये कण अंदर जमा होते हैं, तो शरीर उन्हें बाहरी तत्व मानकर प्रतिक्रिया देता है। इससे सूजन, जलन और एलर्जिक रिएक्शन होता है। कुछ सस्ते रंगों में औद्योगिक डाई, धातु कण या रसायन भी मिलाए जाते हैं। ये रसायन श्वसन तंत्र की अंदरूनी परत को परेशान करते हैं। इससे सूखी खांसी, गले में खराश, सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ होती है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी या सांस की बीमारी रहती है, उनमें यह असर अधिक तेज होता है।
धूल, धुआं और भीड़ का असर
होली के दौरान सड़कों पर भीड़ रहती है। डीजे, धुआं, वाहनों की आवाजाही और खुले में जलती लकड़ियों का धुआं हवा की गुणवत्ता को और खराब करता है। जब रंगों के कण प्रदूषण के कणों के साथ मिलते हैं, तो उनका प्रभाव और बढ़ जाता है। फेफड़े हर दिन हवा को फिल्टर करते हैं, लेकिन जब हवा में अत्यधिक कण होते हैं तो उनकी सफाई क्षमता प्रभावित होती है। इससे सांस फूलना और थकान महसूस होती है। कई लोगों में होली के बाद कुछ दिनों तक लगातार खांसी बनी रहती है।
सामान्य लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
त्योहार का आनंद लेते हुए कुछ साधारण कदम फेफड़ों को सुरक्षित रखते हैं।
सबसे पहले, अच्छी गुणवत्ता वाले ऑर्गेनिक या हर्बल रंगों का चुनाव करना चाहिए। ऐसे रंगों में रासायनिक मिलावट कम होती है।
सूखे रंगों को चेहरे पर सीधे न झोंकें। हल्के हाथ से लगाएं ताकि कण कम उड़ें।
भीड़भाड़ और धुएं वाली जगहों से बचना चाहिए। यदि कहीं अधिक धूल या रंग उड़ रहे हों, तो कुछ समय के लिए उस जगह से हट जाना बेहतर रहता है।
जिन लोगों को हल्की एलर्जी रहती है, वे मास्क का उपयोग कर सकते हैं। एक साधारण कॉटन मास्क भी काफी हद तक बड़े कणों को रोकता है।
शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त पानी पीने से श्वसन तंत्र की अंदरूनी सतह नम रहती है और जलन कम होती है।
त्योहार के बाद नाक को सलाइन वॉश से साफ करना भी लाभकारी रहता है। इससे फंसे हुए कण बाहर निकलते हैं।
अस्थमा और COPD मरीजों के लिए विशेष ध्यान
जिन लोगों को अस्थमा या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी COPD होता है, उनके फेफड़े पहले से संवेदनशील होते हैं। इन मरीजों में वायु नलिकाएं संकरी रहती हैं और हल्की सूजन भी सांस लेने में कठिनाई पैदा करती है। ऐसे मरीजों को होली से पहले अपनी दवाइयों की नियमितता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इनहेलर या रेस्क्यू पफ हमेशा साथ रखना चाहिए। त्योहार वाले दिन प्रिवेंटिव इनहेलर लेना न भूलें। किसी भी तरह की लापरवाही लक्षणों को अचानक बढ़ा सकती है। अत्यधिक रंगों की बारिश, धुएं या फोम पार्टी जैसी गतिविधियों से दूरी रखना बेहतर रहता है। खुले स्थान में खेलना ज्यादा सुरक्षित रहता है। यदि सांस फूलना, सीने में जकड़न या घरघराहट शुरू हो जाए, तो तुरंत आराम करें और निर्धारित दवा लें। COPD मरीजों को खासकर धुएं और भीड़ से बचना चाहिए। उनकी फेफड़ों की क्षमता सीमित होती है, इसलिए उन्हें थकान जल्दी होती है। त्योहार को सीमित समय तक और सुरक्षित वातावरण में मनाना ही समझदारी होती है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सतर्कता
बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते और बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है। इसलिए इन दोनों समूहों में रंगों का असर जल्दी दिखाई देता है। यदि बच्चे को लगातार खांसी, तेज सांस या सीने में दर्द हो, तो इसे सामान्य न मानें। बुजुर्गों में पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी हो सकती है। उन्हें अधिक देर तक रंगों और भीड़ में रहने से बचाना चाहिए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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