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Bakrid 2026: बकरीद की नमाज कैसे पढ़ें? जानें नियत, तकबीरें और पुरुषों-औरतों के लिए सही तरीका
Bakrid Ki Namaz Kaise Padhen: बकरीद का यह पावन त्योहार 28 मई 2026 यानी आज पूरे देश में बेहद हर्षोल्लास और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। ईद-उल-अजहा यानी बकरीद इस्लाम का बेहद पाक और अहम त्योहार माना जाता है। यह दिन हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी, अल्लाह पर भरोसे और इंसानियत की मिसाल का प्रतीक है। बकरीद के दिन मुसलमान सबसे पहले ईद की खास नमाज अदा करते हैं, जिसके बाद कुर्बानी का अमल पूरा किया जाता है। लेकिन क्योंकि यह नमाज साल में केवल एक बार पढ़ी जाती है, इसलिए बहुत से लोगों को इसकी नियत, अतिरिक्त तकबीरों और सही तरीके को लेकर भ्रम रहता है। खासतौर पर युवा और बच्चे अक्सर यह जानना चाहते हैं कि बकरीद की नमाज में कितनी तकबीरें होती हैं और इसे स्टेप-बाय-स्टेप कैसे पढ़ा जाता है। आइए आसान भाषा में जानते हैं ईद-उल-अजहा 2026 की नमाज का मुकम्मल तरीका, नियत और जरूरी इस्लामिक नियम।

ईद-उल-अजहा की नमाज कब पढ़ी जाती है?
बकरीद की नमाज सूर्योदय के कुछ समय बाद अदा की जाती है। अलग-अलग शहरों और मस्जिदों में नमाज का समय अलग हो सकता है। इसलिए नमाज के लिए घर से निकलने से पहले अपने शहर की मस्जिद या ईदगाह का समय जरूर पता कर लें।
नमाज से पहले क्या करना सुन्नत माना गया है?
ईद की नमाज से पहले कुछ खास सुन्नत अमल बताए गए हैं-
सुबह जल्दी उठकर गुस्ल (स्नान) करना
साफ और अच्छे कपड़े पहनना
पुरुषों का इत्र लगाना
तकबीर पढ़ते हुए ईदगाह जाना
नमाज के लिए समय से पहले पहुंचना
इन बातों का पालन करना सुन्नत और सवाब का काम माना जाता है।
बकरीद की नमाज में कितनी तकबीरें होती हैं?
ईद-उल-अजहा की नमाज में कुल 6 अतिरिक्त तकबीरें होती हैं।
पहली रकात में 3 अतिरिक्त तकबीरें
दूसरी रकात में 3 अतिरिक्त तकबीरें
इन्हीं अतिरिक्त तकबीरों की वजह से ईद की नमाज सामान्य नमाज से अलग होती है।
ईद-उल-अजहा की नमाज की नियत कैसे करें?
नमाज शुरू करने से पहले दिल में नियत करना जरूरी माना जाता है। यदि किसी को पूरे अल्फाज याद न हों तो वह दिल में यह इरादा कर सकता है कि "जो नियत इमाम की वही मेरी।"
नमाज की नियत
"मैं नियत करता हूं दो रकात नमाज ईद-उल-अजहा की, छः जायेद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ। अल्लाहु अकबर।"
पहली रकात का सही तरीका
सबसे पहले इमाम "अल्लाहु अकबर" कहेंगे। दोनों हाथ कान तक उठाकर बांध लें। इसके बाद "सुब्हानकल्लाहुम्मा..." यानी सना पढ़ें।
अब 3 अतिरिक्त तकबीरें कही जाएंगी-
पहली तकबीर पर हाथ उठाकर छोड़ दें
दूसरी तकबीर पर भी हाथ छोड़ दें
तीसरी तकबीर पर हाथ बांध लें
इसके बाद इमाम सूरह फातिहा और कोई दूसरी सूरह पढ़ेंगे। फिर रुकू और सजदा सामान्य नमाज की तरह किया जाएगा।
दूसरी रकात का तरीका
दूसरी रकात में इमाम पहले सूरह फातिहा और दूसरी सूरह पढ़ेंगे। इसके बाद 3 अतिरिक्त तकबीरें होंगी-
पहली तकबीर पर हाथ उठाकर छोड़ दें
दूसरी तकबीर पर भी हाथ छोड़ दें
तीसरी तकबीर पर भी हाथ छोड़ दें
अब चौथी बार "अल्लाहु अकबर" कहते हुए सीधे रुकू में चले जाएं। इसके बाद नमाज सामान्य तरीके से पूरी की जाती है।
नमाज पूरी होने के बाद क्या किया जाता है?
नमाज के बाद इमाम साहब खुत्बा पढ़ते हैं, जिसे ध्यान से सुनना जरूरी माना गया है। इसके बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद देते हैं और फिर कुर्बानी का अमल शुरू किया जाता है।
क्या महिलाएं घर पर बकरीद की नमाज पढ़ सकती हैं?
मौलाना के अनुसार, औरतें घर पर ईद की नमाज नहीं पढ़ सकती हैं। अगर उन्हें नमाज पढ़नी है तो वो ईदगाह में जाएं या जमात के साथ नमाज पढ़ें। हालांकि अलग-अलग मस्लक और स्थानीय परंपराओं के अनुसार नियमों में अंतर हो सकता है।
नमाज पढ़ते समय इन बातों का रखें ध्यान
जल्दबाजी बिल्कुल न करें
इमाम की तकबीर ध्यान से सुनें
अतिरिक्त तकबीरों का क्रम न भूलें
सना पढ़ना जरूरी माना जाता है
नमाज के दौरान बातचीत न करें
अगर किसी को तरीका याद न हो तो आसपास के लोगों को देखकर भी आसानी से नमाज अदा की जा सकती है।
बकरीद का असली संदेश क्या है?
ईद-उल-अजहा केवल कुर्बानी का त्योहार नहीं है, बल्कि यह त्याग, सब्र, इंसानियत और अल्लाह की राह में समर्पण का पैगाम देता है। इस दिन जरूरतमंदों की मदद करना, गरीबों में कुर्बानी का मांस बांटना और आपसी भाईचारा बढ़ाना सबसे बड़ा अमल माना जाता है।
हाँ, खवातीन (महिलाएं) नापाकी या पीरियड्स के दिनों में भी नमाज़ के वक्त के अनुसार कसरत से तकबीरे तशरीक, दुरूद शरीफ और अल्लाह का जिक्र कर सकती हैं। इसमें कोई मनाही नहीं है, बस उन्हें नमाज़ पढ़ने और क़ुरआन छूने की इजाजत नहीं होती।
शरीयत के मुताबिक, जिन शहरों या कस्बों में ईद की नमाज़ होती है, वहाँ नमाज़-ए-ईद और खुतबा मुकम्मल होने से पहले कुर्बानी करना जायज नहीं है। नमाज़ के बाद ही छुरी चलाई जानी चाहिए। हाँ, अगर कोई सुदूर ग्रामीण इलाके में है जहाँ ईद की नमाज़ नहीं होती, तो वह फज्र की नमाज़ के बाद कुर्बानी कर सकता है।
बकरीद (ईद-उल-अजहा) की नमाज़ आमतौर पर सूर्योदय (सूर्ज निकलने) के लगभग 20 से 25 मिनट बाद पढ़ी जाती है। अलग-अलग शहरों में ईदगाह और मस्जिदों के हिसाब से इसका समय सुबह 5:30 बजे से 9:00 बजे के बीच अलग-अलग हो सकता है।



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