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World Saree Day 2024: काफी महंगी होती है कांजीवरम साड़ी, खरीदते हुए असली-नकली में ऐसे करें पहचान
कांजीवरम साड़ी तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में कांचीपुरम में बनाई जाती है और देश की सबसे मशहूर साड़ियों में गिनी जाती है। कांजीवरम साड़ियां दक्षिण भारत में विवाह और विशेष अवसरों पर पहनी जाती हैं और वहां उतनी ही लोकप्रिय हैं जितनी उत्तर भारत में बनारसी रेशम साड़ियां। इसकी लोकप्रियता के कारण बाजार में कई प्रकार की कांजीवरम साड़ियां उपलब्ध हैं।
कांजीवरम साड़ियों के नाम पर बाजार में धोखाधड़ी आम है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को असली और नकली फैब्रिक की पहचान नहीं होती। परिणामस्वरूप, वे महंगे दाम पर नकली कांजीवरम साड़ियां खरीद लेते हैं। आइए जानतक हैं असली और नकली कांजीवरम साड़ी में अंतर।

कांजीवरम साड़ियां महंगी क्यों होती है?
कांजीवरम साड़ियां महंगी होने के पीछे कई कारण हैं। पहला, इनमें इस्तेमाल होने वाला रेशमी धागा शहतूत के कीड़ों से बनाया जाता है, जिन्हें पालना बेहद जटिल प्रक्रिया है। यह थ्रेड उच्च गुणवत्ता का और महंगा होता है।
दूसरा कारण है इनका हैंडलूम पर हाथ से बुना जाना। एक साड़ी की बुनाई में 15 दिन से लेकर छह महीने तक का समय लग सकता है। उनकी जटिल डिजाइन, रंग, और थ्रेड की क्वालिटी इनकी कीमत बढ़ाते हैं। इन साड़ियों की कीमत ₹10,000 से ₹1,00,000 तक हो सकती है। हर कांजीवरम साड़ी एक अनूठी कलाकृति होती है, जो इसे और भी खास बनाती है।
धागे से करें पहचान
असली कांजीवरम साड़ी बनाने के लिए रेशम के धागों का इस्तेमाल होता है, जिनकी बनावट दानेदार होती है। असली साड़ी को छूने पर इसकी पहचान की जा सकती है, जबकि नकली साड़ी घिसते वक्त धीमी आवाज करती है। नकली साड़ी की जरी में सफेद धागा होता है, जबकि असली साड़ी में लाल रंग की जरी होती है।
सिल्क क्वालिटी से करें पहचान
फ्योर कांजीवरम साड़ियां उच्च गुणवत्ता वाले रेशम से बनी होती हैं, जिनकी बनावट नरम और चिकनी होती है। इनका मुलायम और शानदार स्पर्श महसूस करने के लिए आप कपड़े पर उंगलियां फिराकर देख सकते हैं। असली कांजीवरम साड़ी में प्राकृतिक चमक होती है, जो इसे एक रिच अपीरियंस देती है। अगर आप असली और नकली साड़ी में फर्क करना चाहते हैं, तो साड़ी को रोशनी में पकड़ें। असली कांजीवरम साड़ी हेवी वर्क के बावजूद हल्की होती है, जबकि नकली साड़ी भारी होती है।
जरी वर्क से करें पहचान
कांजीवरम साड़ियां अपनी जटिल जरी वर्क के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनमें मैटलिक धागों से एलेब्रेट पैटर्न बनाए जाते हैं। असली जरी सिल्वर-कोटेड गोल्ड से बनी होती है, जिनकी प्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए हॉलमार्क का निशान होता है। प्योर कांजीवरम साड़ियों में फाइन जरी की बुनाई होती है, जिसमें मोटिफ्स अच्छी तरह से वेल डिफाइन होते हैं। इन साड़ियों में मुगल इंस्पायर्ड डिजाइन होते हैं और बार-बार धोने के बावजूद इनकी चमक बनी रहती है, जो इसे विशेष बनाती है।
जलाकर पता करें
असली कांजीवरम साड़ी के धागे को जलाने पर गंधक जैसी महक आती है, जबकि नकली साड़ी जलाने पर राख नहीं बनती। प्योर कांजीवरम साड़ियों में उच्च गुणवत्ता वाले रंगों का उपयोग किया जाता है। आप साड़ी के एक छोटे हिस्से को सफेद कपड़े से रगड़कर ब्लीडिंग या फेडिंग के लक्षण की जांच कर सकते हैं।



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