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इंसुलिन क्या है जिसकी जेल में डिमांड कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल? कैसे शुगर लेवल करता है कंट्रोल
what is insulin : मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल डायबिटीज के मरीज हैं। वो आए दिन अपने शुगर लेवल की वजह से चर्चा में बने रहते हैं। अरविंद केजरीवाल ने अपने डायबिटीक होने की वजह से कोर्ट से इंसुलिन की डिमांड करते हुए कहा था उनका नॉर्मल शुगर लेवल रोजाना 300 mg/dl और फास्टिंग शुगर 160-200 mg/dl तक पहुंच रहा है।
सीएम ने अब कोर्ट से रोजाना इंसुलिन की मांग की है। इसके अलावा केजरीवाल ने अपने सेहत होने के सभी दावों को भी खारिज कर दिया। वहीं कोर्ट ने उनकी सेहत को देखते हुए AIIMS को निर्देश दिया कि केजरीवाल की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाए ताकि यह पता चल सके कि उन्हें शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन की जरूरत है या नहीं।

इतनी गहमागहमी के बीच समझने की कोशिश करते हैं कि इंसुलिन क्या हैं और ब्लड शुगर मरीजों के लिए ये क्यों जरुरी होता है।
इंसुलिन क्या है? (What is Insulin )
इंसुलिन एक तरह का शरीर में बनने वाला हॉर्मोन है, जिसका शरीर में प्राकृतिक रुप से उत्पादन होता है। इस हार्मोन का मुख्य काम रक्त में मिलकर ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना होता है। इस हार्मोन का उत्पादन अग्नाश्य यानी पैनक्रियाज में होता है। भोजन करने के बाद जब रक्त में शुगर और ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने लगती है, उस समय उस बढ़ी हुई शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का स्त्राव होता है। इस तरह शरीर का शुगर लेवल कंट्रोल रहता है। जब शरीर में इस हार्मोन के उत्पादन में गड़बड़ी होने लगती है, तब डायबिटीज यानी शुगर की शिकायत शुरु हो जाती है।
डायबिटीज मरीज को क्यों दी जाती है इंसुलिन?
जिन लोगों को टाइप-1 डायबिटीज की समस्याएं होती है, उनके पैनक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाएं नष्ट हो जाती है। जिस वजह से इंसुलिन नहीं बन पाता है। वहीं टाइप-2 डायबिटीज वालों के शरीर में इंसुलिन बनता है लेकिन वो प्रभावी रुप से अपना काम नहीं कर पाता है। इस स्थिति में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए डायबिटीज मरीजों क इंसुलिन की आवश्यकता होती है।
डायबिटीज मरीज को दिया जाता है इंसुलिन इंजेक्शन
जैसा कि जब इंसुलिन के उत्पादन में गड़बड़ी होने लगती है तो शरीर में शुगर लेवल बढ़ने लगता है। डायबिटीज मरीजों को शुगर कंट्रोल करने के लिए अपनी आवश्यकतानुसार इंसुलिन के इंजेक्शन लगवाते हैं। अगर आप डायबिटीज के मरीज है तो आपकी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर तय करेगा कि आपको किस इंजेक्शन की आवश्यकता है।
-एक इंसुलिन इंजेक्शन लगने के मात्र 15 मिनट बाद असर दिखाने लगता है लेकिन इसका असर चार घंटे तक शरीर पर रहता है।
-दूसरा इंसुलिन इंजेक्शन वह होता है, जो लगने के करीब 30 मिनट बाद असर दिखाता है और 6 घंटे तक इंसुलिन की कमी को पूरा करता है।
-वहीं एक इंसुलिन इंजेक्शन लगने के 2 घंटे बाद काम करना शुरु करता है लेकिन इसकी प्रभावशीलता 12 घंटे तक रहती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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