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अरविंद केजरीवाल को PET-CT स्कैन करवाने की सलाह, जानें क्या है और किसे पड़ती है जरुरत?
What is PET-CT Scan Test : इन दिनों जमानत पर चल रहे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट से 7 दिन के लिए जमानत बढ़ाने की अपील की है। मेडिकल कंडीशन को आधार बताते हुए केजरीवाल ने कहा है कि उनका वजन 7 किलो कम हो गया है और कीटोन लेवल हाई होने की वजह से उन्हें कोई गंभीर बीमारी सकती है।
आम आदमी आदमी का भी कहना है कि डॉक्टर्स ने केजरीवाल को PET-CT (पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी और कंप्यूटेड टोमोग्राफी ) स्कैन टेस्ट करवाने की नसीहत दी है। यह टेस्ट आमतौर पर कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है। आइए जानते क्या है ये टेस्ट और किसे इसे कराने की पड़ती है आवश्यकता?

PET स्कैन टेस्ट क्या होता है?
PET-Scan Test ऐसी बीमारियां का पता लगाने के लिए किया जाता है। जिनका पता एक्स-रे से भी नहीं चल सकता है। पीईटी स्कैन को पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी स्कैन टेस्ट कहते हैं। ये टेस्ट कैंसर, हार्ट डिजीज और न्यूरोलॉजिकल जैसी समस्याओं के बारे में पता लगाने के लिए किया जाता है। पीईटी स्कैन टेस्ट में मरीज को किसी तरह का दर्द महसूस नहीं होता है।
इस टेस्ट की वजह से कैंसर सेल्स के बारे में आसानी से पता चल जाता है। यह शरीर में छिपे छोटी से छोटी कैंसर सेल्स को पता कर फर्स्ट स्टेज में ही आप इसका इलाज शुरु कर सकते हैं।
कैसे होता है ये टेस्ट?
इस टेस्ट में एक खास तरह का रेडियोएक्टिव फ्लूइड शरीर में इंजेक्शन से अंदर डाला जाता है। जिसे टिश्यूज और स्किन सेल्स सोख लेते हैं। बाद में इस बात की जांच की जाती है कि यह रेडियोएक्टिव फ्लूइड सबसे ज्यादा किस एरिया में अब्जॉर्ब हुआ है फिर उस एरिया की जांच की जाती है। क्योंकि सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर सेल्स जल्दी रेडियोएक्टिव पदार्थ को सोख लेती हैं। इससे जांच करने में आसानी हो जाती है।
किन बीमारियों में किया जाता है PET स्कैन?
- ऑन्कोलजी यानीकैंसर
- न्यूरोलॉजी यानी ब्रेन से जुड़ी बीमारियां
- कार्डियोलजी यानी हार्ट से जुड़ी बीमारियां
- पार्किंसन बीमारी
- सीजोफ्रेनिया
- मिर्गी
PET स्कैन टेस्ट का फायदा
इस स्कैन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस टेस्ट के जरिए समय रहते बीमारी का पता कर समय पर इलाज शुरु कर सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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