#World Health Day: जानें टाइप 2 डायबिटीज में किन-किन अंगों पर पड़ता है प्रभाव

टाइप 2 डायबिटीज से प्रभावित लोगों का ब्लड शुगर लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है जिसको नियंत्रण करना बहुत मुश्किल होता है।

अगर आपको इन डायबिटीज के लक्षण खुद में दिखाई दें, तो इन्‍हें बिल्‍कुल भी अनदेखा ना करें क्‍योंकि इससे आपकी जान को काफी खतरा हो सकता है।

टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम जिन्‍हें भी है, उनको हर तीन महीने में खुद का चेकअप करवाना चाहिये। नियमित चेकअप करवाने से आपको अपने मन की शांति प्राप्‍त होगी और इस बात का भी भरोसा होगा कि आपको अभी कोई खतरा नहीं है।

आज इस आर्टिकल में हम आपको यह बताने जा रहे हैं टाइप 2 डायबिटीज़ होने पर किन-किन अंगों पर सबसे ज्‍यादा प्रभाव पड़ता है। हम आशा करते हैं कि इसे पढने के बाद आप अपने शरीर को ले कर थोडे़ चौकन्‍ने हो जाएंगे।

 हृदय पर पड़ता है प्रभाव

हृदय पर पड़ता है प्रभाव

सबसे पहले आपके हृदय और खून की धमनियों पर प्रभाव पड़ता है। अगर आप अपनी मधुमेह की बीमारी का इलाज नहीं करवाएंगे तो 70 प्रतिशत तक चांस है कि अपको भविष्‍य में स्‍ट्रोक या हार्ट अटैक हो सकता है।

आंखें हो सकती हैं खराब

आंखें हो सकती हैं खराब

इसमें आंखें तो खराब होती ही हैं और साथ में जो एक और आंखों से संबन्‍धित बीमारी होती है वह है diabetic retinopathy. इस बीमारी के दौरान आंखों में रैटीना तक पहुंचने वाली खून की ध‍मनियां खराब हो जाती हैं। अगर केस काफी सीरियस हुआ तो आपको मोतियाबिंद या कैटरैक्‍ट भी हो सकता है।

किडनियां हो जाती हैं फेल

किडनियां हो जाती हैं फेल

किडनियों में अरबों खून की धमनियां होती हैं जो कि खून से गंदगी छानने का काम करती हैं। जब मधुमेह की बीमारी ठीक नहीं होती तो किडनी अपना काम करना बंद कर देती है और पेशेंट को या तो किडनी ट्रांसप्‍लांट करवाना पड़ता है या फिर डायलिसिस पर जाना पड़ता है।

तंत्रिकाएं हो जाती हैं खराब

तंत्रिकाएं हो जाती हैं खराब

शरीर में अत्‍यधिक शुगर होने की वजह से छोटी-छोटी कोशिकाओं की दीवारें खराब हो जाती हैं, जो कि खासतौर पर पैरों में होती हैं। ये कोशिकाएं तंत्रिकाओं तक पोषण पहुंचाने का काम करती हैं। अगर मधुमेह ठीक ना किया गया तो पैर सुन्‍न हो जाएंगे तथा वे महसूस करने की क्षमता खो बैठेंगे।

 पैरों का रखें खास ख्‍याल

पैरों का रखें खास ख्‍याल

इस बीमारी के दौरान पैरों में अगर चोट या कोई संक्रमण हो गया हो तो उसका तुरंत ही इलाज करवाना चाहिये नहीं तो पैरों को अलग भी करना पड़ सकता है।

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