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इंसुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाने के लिए अपनाएं यह आसान उपाय
शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए कई तरह के हार्मोन काम करते हैं। इन्हीं में से एक है इंसुलिन। इंसुलिन एक आवश्यक हार्मोन है जो आपके रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। यह हार्मोन आपके रक्त से शर्करा को आपकी कोशिकाओं में ले जाने में मदद करता है। लेकिन जब शरीर में सेल्स इंसुलिन रेसिस्टेंट होती हैं, तो वे इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाती हैं, जिससे आपका रक्त शर्करा उच्च हो जाता है। जिसके कारण टाइप 2 मधुमेह होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा नसों और अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
ऐसे में शरीर में इंसुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता होती है। इंसुलिन सेंसेटिविटी का अर्थ है कि आपकी कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कितनी प्रतिक्रियाशील हैं। जब आप इसे बेहतर बनाते हैं, तो आपको इंसुलिन रेसिस्टेंस और मधुमेह सहित कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको इंसुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाने के कुछ आसान उपाय बता रहे हैं-

लें अच्छी नींद
बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद लेना बेहद आवश्यक है। नींद की कमी के चलते संक्रमण, हृदय रोग और टाइप 2 मधुमेह का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, नींद की कमी का कनेक्शन इंसुलिन सेंसेटिविटी से भी है। जब आप नींद कम लेते हैं, तो यह इंसुलिन रेसिस्टेंस को बढ़ा सकती है। वहीं, दूसरी ओर अच्छी नींद लेने से इसके प्रभावों को उलटने में मदद मिल सकती है।

करें व्यायाम
नियमित व्यायाम इंसुलिन सेंसेटिविटी को बढ़ाने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। जब आप व्यायाम करते हैं, तो यह शुगर को मसल्स में स्थानांतरित करने में मदद करता है और इससे इंसुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। आप चाहे एरोबिक्स करें या फिर रेसिस्टेंस ट्रेनिंग, यह दोनों ही इंसुलिन सेंसेटिविटी को बढ़ाती है। साथ ही इन दोनों को एक साथ करने से बेहतर रिजल्ट मिलते हैं।

तनाव के लेवल को करें मैनेज
शरीर में तनाव के स्तर को नियंत्रित करके भी इंसुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाया जा सकता है। निरंतर तनाव आपके तनाव हार्मोन के स्तर को उच्च रखता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है। इतना ही नहीं, तनाव हार्मोन शरीर को अधिक इंसुलिन रेसिस्टेंट बनाते हैं। ऐसे में आप तनाव हार्मोन को कम करने के लिए ध्यान, व्यायाम और नींद आदि एक्टिविटीज पर पर्याप्त ध्यान दें।

वजन को करें कम
अगर आपका वजन अधिक है, तो इससे टाइप 2 मधुमेह व इंसुलिन रेसिस्टेंस का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। अधिक वजन, विशेष रूप से पेट के एरिया में फैट, इंसुलिन सेंसेटिविटी को कम करता है। आपको शायद पता ना हो, लेकिन बेली फैट मांसपेशियों और लीवर में इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ावा देने वाले हार्मोन बनाता है। इसलिए, अगर आप नेचुरल तरीके से शरीर में इंसुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाना चाहती हैं, तो ऐसे में अपने शरीर के अतिरिक्त वजन को कम करने का प्रयास करें।

सॉल्यूबल फाइबर को डाइट में करें शामिल
फाइबर को आमतौर पर दो कैटेगिरी में बांटा जाता है - सॉल्यूबल और इनसॉल्यूबल। इनसॉल्यूबल फाइबर ज्यादातर मल को आंतों के माध्यम से स्थानांतरित करने में मदद करने के लिए एक एजेंट के रूप में कार्य करता है। जबकि सॉल्यूबल फाइबर से कई लाभ मिलते हैं- जैसे कोलेस्ट्रॉल कम करना और भूख कम करना। इतना ही नहीं, सॉल्यूबल फाइबर इंसुलिन सेंसेटिविटी को इंप्रूव करने में मदद करता है। यह आपकी आंत में गुड बैक्टीरिया की संख्या को बढ़ाते हैं।

सब्जियों व फल को करें डाइट में शामिल
हेल्दी रहने के लिए डाइट में अधिक से अधिक फल व सब्जियां खाने की सलाह दी जाती है। इसमें मौजूद विटामिन्स व मिनरल्स शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा, कलरफुल फल और सब्जियां प्लांट कंपाउंड से भरपूर होते हैं जो इंसुलिन सेंसेटिविटी को बढ़ाने में मदद करती हैं। हालांकि, यहां आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप एक बार में बहुत अधिक फल न खाएं, क्योंकि कुछ फलों में चीनी की मात्रा अधिक होती है।

एडेड शुगर को रखें कम
आमतौर पर, हम अपनी डाइट से दो तरह की शुगर का सेवन करते हैं। पहला नेचुरल शुगर और दूसरा एडेड शुगर। नेचुरल शुगर कई तरह के प्लांट व वेजिटेबल्स में पाई जाती है, जो कई तरह के पोषक तत्वों से युक्त होती है। वहीं, एडेड शुगर हाई प्रोसेस्ड फूड्स में पाई जाती है। इसका सेवन सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। एडेड शुगर का अधिक सेवन इंसुलिन रेसिस्टेंस के उच्च जोखिम से जुड़ा हुआ है। इसलिए, आपको अपनी डाइट में ऐसे फूड आइटम्स को शामिल करना चाहिए, जिनमें नेचुरल शुगर हो।



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