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Diabetic Eye: क्या होती है डायबिटीक आई, आंखों के लिए क्यों है ये बड़ा खतरा
आपकी धुंधली होती हुई नजर की कहीं वजह डायबिटीज तो नहीं है। जी हां, धुंधलापन डायबिटीज के लक्षणों में से एक है। कई बार आप डायबिटीज को मैनेज करके और आई ड्रॉप्स डालकर आंखों के धुंधलेपन की समस्या से छुटकारा पा लेते हैं। लेकिन कई बार ये समस्या ज्यादा बढ़ने की वजह से आपको डायबिटीक आई की समस्या होती हो सकती है, जिसे नजरअंदाज करने की वजह से आंखों की साथ ज्यादा दिक्कत हो सकती है। आइए जानते है कि क्या होती है डायबिटीक आई और कैसे इसे बचा जा सकता है।

डायबिटीक आई क्या है?
डायबिटीक आई (Diabetic Eye) आंखों की समस्याओं के लिए एक टर्म है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई आंखों से संबंधित समस्या डायबिटीज की वजह से होती है, जैसे :
डायबिटीक रेटिनोपैथी,
डायबिटीक मैकुलर एडिमा,
मोतियाबिंद, और ग्लूकोमा। अनियंत्रित ब्लड शुगर लेवल की वजह से आपकी आंखें डैमेज हो सकती है।

डायबिटीक रेटिनोपैथी
डायबिटिक रेटिनोपैथी तब होती है जब रेटिना में रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं, जब ये लीक हो जाती हैं या पूरी तरह से बंद हो जाती हैं। असामान्य नई रक्त वाहिकाएं रेटिना की सतह पर भी विकसित हो सकती हैं।
जिन लोगों को डायबिटीक है या अनियंत्रित शुगर कंट्रोल है, उन्हें डायबिटिक रेटिनोपैथ का खतरा ज्यादा होता है। लंबी डायबिटीज की समस्या के बाद ये समस्या देखने को मिलती है।

डायबिटिक मैकुलर एडिमा
मैकुलर एडिमा की समस्या तब होने लगती है जब रेटिना के पास द्रव बनने लगता है और इससे सूजन और धुंधलेपन की समस्या होने लगती है। इसे ही डायबिटीक मैकुलर एडीमा कहा जाता है। ये समस्या स्थायी विजन लॉस की वजह भी बन सकता है।

डायबिटीज और मोतियाबिंद
डायबिटीज में अत्यधिक ब्लड शुगर की वजह से मोतियाबिंद की समस्या हो सकती है। इस समस्या से बचने के लिए आप आपको मोतियाबिंद सर्जरी की जरुरत पड़ सकती है। ब्लड शुगर को कंट्रोल करने से लेंस और सर्जरी के बाद क्लाउड रोकने में मदद मिलती है।

मधुमेह और ग्लूकोमा
ग्लूकोमा बीमारियों का एक समूह है जो आपकी आंख की ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचाता है। इस क्षति से स्थाई विजन लॉस हो सकता है। मधुमेह होने से ग्लूकोमा होने की संभावना दोगुनी हो जाती है
डायबिटीज और अन्य आंखों की समस्याएं
डायबिटीज की वजह से आंखों के साथ अन्य दिक्कतें भी हो सकती है।

धुंधलापन
यदि आपका रक्त शर्करा का स्तर तेजी से बदलता रहता है, तो यह आपकी आंखों के लेंस के आकार को प्रभावित कर सकता है, जिससे धुंधलापन हो सकता है। जैसे ही आपका ब्लड शुगर स्थिर होता है वैसे ही धुंधलेपन की समस्या भी सामान्य हो जाती है। धुंधलेपन की समस्या होने पर चश्मा बदलने की जगह ब्लड शुगर नियंत्रित करें। ताकि आपको स्पष्ट वजह मालूम चल सकें।
डबल विजन या दोहरी दृष्टि
डायबिटीज आंखों को हिलाने वाली नसों को नुकसान पहुंचाने का काम करती है और उन्हें एक साथ काम करने में मदद कर सकता है। ये नर्व डैमेज होने की वजह से आपको डबल विजन यानी दोहरी दृष्टि की समस्या हो सकती है।
बचाव का तरीका
आंखों डायबिटीज से बचाने के लिए जरुरी है कि आप अपना ब्लड शुगर कंट्रोल रखें। इसलिए फिजिशियन या डाइटिशियन से पूछकर डाइट का ख्याल रखें और एक्सरसाइज करना। डायबिटीज के मरीज आंखों का नियमित जांच करें।
आखों के अस्तर को रेटिना कहा जाता है। अच्छी दृष्टि के लिए एक स्वस्थ रेटिना आवश्यक है। डायबिटिक की स्थिति में रेटिना में रक्त वाहिकाओं के रिसाव या अवरुद्ध होने लगता है और इससे दृष्टि को नुकसान होने लगता है। आमतौर पर, मधुमेह के रोगियों में डायबिटीक रेटिनोपैथी की समस्या विकसित होने लगती है, ये समस्या डायबिटीज के 3-5 वर्षों के बीच देने को मिलती है।
हालांकि उपचार से डायबिटिक रेटिनोपैथी की गति को धीरे करके खत्म भी सकता है, लेकिन यह इलाज नहीं है। क्योंकि डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जो जीवन पर्यंत साथ रहती है, भविष्य में रेटिना की क्षति और विजन लॉस की संभावना रहती है। डायबिटिक रेटिनोपैथी के इलाज के बाद भी, आपको नियमित रूप से आंखों की जांच कराना जरुरी होता है।
अगरसमय रहते हुए रेटिनोपैथी का पता चल जाए तो अंधेपन को रोका जा सकता है। हालांकि मधुमेह से पीड़ित कई लोगों में दृष्टि दोष की समस्याएं देखी गई है, लेकिन 5% से कम लोगों को ही गंभीर दृष्टि हानि हुई है।



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