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बच्चे को जिंक खिलाएं वरना उन्हें ऑटिस्म हो सकता है

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक अध्ययनकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि जो बच्चे ऑटिज्म और इससे संबंधित परिस्थितियों से ग्रसित थे उनमें जस्ते का स्तर कम था। तोक्यो के इन अध्ययनकर्ताओं का यह भी कहना है कि उनके इस अध्ययन से ऑटिज्म का इलाज करने और उसे रोकने में सहायता मिलेगी। अपने इस अध्ययन में अध्ययनकर्ताओं ने ऑटिज्म या इससे संबंधित परिस्थितियों से ग्रसित तकरीबन दो हजार बच्चों के बालों में जस्ते का स्तर नापा।
इससे कम उम्र के बच्चों में जस्ते का स्तर कम होने के संकेत मिले। कुल मिलाकर, तकरीबन एक-तिहाई बच्चों में जस्ते का स्तर कम पाया गया। तीन साल तक की उम्र के 50 प्रतिशत लड़कों और 50 प्रतिशत से ज्यादा लड़कियों में यह कमी पाई गई। अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वृद्धि और विकास के लिए कम उम्र के बच्चों को ज्यादा उम्र के बच्चों के मुकाबले ज्यादा जस्ते की जरूरत होती है। इसके अलावा शुरआती साल में जस्ते की कमी के कारण ऑटिज्म का प्रभाव पड़ सकता है।
साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार कुछ मामले ज्यादा गंभीर थे। दो साल के एक बच्चे में अपेक्षित मात्रा का मात्र बारहवां भाग जस्ता पाया गया। अपने निष्कर्ष में अध्ययनकर्ताओं ने कहा, पोषण संबंधी पद्धति से ऑटिज्म के इलाज और इसे रोकने में सहायता मिलेगी। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डोरोथी बिशप ने कहा, अगर भविष्य के अध्ययनों में भी जस्ते की कमी की पुष्टि होती है तो यह अस्पष्ट होगा कि क्या यह ऑटिज्म का एक कारण है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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