Latest Updates
-
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर -
Mangalwar Vrat: पहली बार रखने जा रहे हैं मंगलवार का व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम और पूजा विधि -
Sheetala Saptami Vrat Katha: शीतला सप्तमी के दिन जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा आरोग्य का आशीर्वाद -
Sheetala Saptami 2026: कब है शीतला सप्तमी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Sheetala Saptami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को दें शीतला सप्तमी की शुभकामना -
मंगलवार को कर लें माचिस की तीली का ये गुप्त टोटका, बजरंगबली दूर करेंगे हर बाधा
इन सब्जियों को खाने से होती है पेट में गैस
सब्जियां हमारे आहार का सबसे पौष्टिक हिस्सा होती है। इससे हमारे शरीर को सभी जरूरी चीजें प्राकृतिक रूप में मिलती हैं। हालांकि कुछ साग-सब्जियां ऐसी भी होती है, जिसमें अच्छाइयां तो होती हैं, पर इसके साइड इफैक्ट भी कम नहीं होते। ऐसी साग-सब्जी शरीर को जरूरी पौष्टिक तत्व प्रदान करने के अलावा सामान्य से ज्यादा गैस भी बनाती हैं, जिससे पेट में ब्लोटिंग की समस्या आ जाती है। इससे भोजन के बाद कष्ट की स्थिति पैदा हो जाती है।
कई मामलों में ज्यादा गैस बनने से दर्द भी होने लगता है। कुछ सब्जियों में विभिन्न प्रकार के सुगर जैसे रैफीनोज, लैक्टोज, फ्रुक्टोज और सोबिटोल पाए जाते हैं, जो सामान्य से ज्यादा गैस बनाने के लिए जाने जाते हैं। रैफीनोज सब्जियों में पाया जाने वाला काम्प्लेक्स सुगर है, जो गैस के कारण होने वाले ब्लोटिंग और दर्द को बढ़ा देता है। कुछ भोजन दूसरे की तुलना में ज्यादा गैस बनाते हैं। हालांकि यह व्यक्ति पर भी निर्भर करता है। जरूरी नहीं कि जो भोजन एक व्यक्ति में गैस बना रहा है, वह दूसरे में भी बनाए।
अगर आप को लगे कि कुछ सब्जियों को खाने के बाद गैस ज्यादा मात्रा में बन रही है, तो इसपर तुरंत ध्यान दें और ऐसी सब्जियों को खाना कम कर दें। गैस से बचने के लिए आप इन सब्जियों को खाना पूरी तरह से बंद नहीं कर सकते हैं। हां, आप इसका सेवन कम कर सकते हैं। या फिर इसे लंबे-लंबे अंतराल पर खा सकते हैं।
आइए हम आपको कुछ ऐसी सब्जियों के बारे में बताते है, जो ज्यादा गैस बनाने के लिए जानी जाती हैं-

1. प्याज
आप देश के किसी भी हिस्से में चले जाएं, वहां के भोजन में आपको प्याज जरूर मिलेगा। खाना बनाने में प्याज का इस्तेमाल न करना मुश्किल है। हालांकि आप इसकी मात्रा को कम करके ब्लोटिंग और ज्यादा गैस बनने की संभावना को कम कर सकते हैं। मजेदार बात यह है कि प्याज को बिल्कुल न खाने से शरीर को कई तरह का फायदा पहुंचता है।

2. चोकीगोभी
यह बंदगोभी और ब्रोकली की प्रजाति की एक सब्जी है। इसे अच्छी-खासी मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, फॉलिक एसिड और डाइट्री फाइबर पाया जाता है। हालांकि इसमें ओलिगोसेकहाराइड्स नामक काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो पाचन के दौरान ब्लोटिंग और ज्यादा गैस का कारण बन जाता है।

3. मकई
यह एक और प्रमुख भोजन है, जो कई तरह के पौष्टिक तत्वों और सुक्रोज से भरपूर होते हैं। चूंकि इसमें बड़ी मात्रा में स्टार्च और सूगर पाए जाते हैं, इसलिए पाचन के दौरान गैस ज्यादा बनता है। इसमें एक काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जो हाई-फाइबर और नेचुरल सुगर के साथ आसानी से नहीं पचता। नतीजतन गैस ज्यादा बनता है।

4. ब्रोकली
ब्रोकली गोभी वर्ग का एक सदस्य है। यह विटामिन, मिनरल्स और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होता है, जो स्वास्थ के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इन फायदों के बावजूद भी कुछ लोग इसे खाने से परहेज करते हैं, क्योंकि इससे गैस बनती है। ब्रोकली में पाए जाने वाले सुगर को रैफीनोज कहते हैं। एंजाइम द्वारा इसे पचाया नहीं जा सकता है, जिससे गैस बनती है।

5. बंदगोभी
बंदगोभी भी कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन स्रोत है, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। हालांकि इसमें ओलिगो सेकहाराइड्स नामक काम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जिससे गैस ज्यादा बनती है।

6. बींस
बीच की हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं और हर किसी का अलग-अलग स्वास्थ लाभ है। बीज में ट्रिपल सुगर स्टाचायोज, क्वाड्रपल सुगर रैफीनोज और पाइव सुगर वरबसकोज पाया जाता है, जिसे हमारा पाचन तंत्र पचा नहीं सकता है। इन सुगर को पचाने के लिए जिस एंजाइम की जरूरत होती है, वह मनुष्य में नहीं पाया जाता है।

7. चकुंदर
अगर आपका गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम काफी संवेदनशील है, तो चकुंदर खाने से ज्यादा गैस बनने के साथ-साथ ब्लोटिंग, फ्लैक्चुलेंस, एब्डोमनल पेन और क्रैंपिंग की समस्या हो सकती है। चकुंदर में पॉली-सेकहाराइड्स नामक कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है, जिसे पचाने में मुश्किल होती है। नतीजतन गैस बनता है।



Click it and Unblock the Notifications











