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अगर आप एक ही स्ट्रॉ से कोल्ड ड्रिंक पीते हैं या एक ही चम्मच से आइसक्रीम खाते हैं, तो सावधान हो जाएं! 'किसिंग डिजीज' एक संक्रमण है, जिसे मेडिकल भाषा में इंफेक्शियस मोनोन्यूक्लियोसिस या ग्लैंड्यूलर फीवर कहा जाता है।
डॉ. प्रवीण मंगलूनिया के अनुसार, यह बीमारी एपस्टीन-बार वायरस (EBV) के कारण होती है, जो लार के जरिए फैलता है। जब कोई व्यक्ति चुंबन या किसी अन्य तरीके से संक्रमित लार के संपर्क में आता है, तो यह वायरस शरीर में फैल जाता है। सीडीसी के मुताबिक, इसे ह्यूमन हर्पीज 4 भी कहा जाता है। डॉ. प्रवीण मंगलूनिया के अनुसार, यह स्वयं सीमित बीमारी (self-limiting disease) है, जो सपोर्टिव ट्रीटमेंट से ठीक हो सकती है।

कैसे फैलता है यह वायरस?
एपस्टीन-बार वायरस (EBV) आमतौर पर युवाओं और किशोरों को अधिक प्रभावित करता है। छोटे बच्चों में संक्रमण के लक्षण कम नजर आते हैं, जबकि बुजुर्गों में इसकी आशंका कम होती है। यह वायरस ब्लड ट्रांसमिशन, सेक्शुअल कॉन्टैक्ट, खांसने और छींकने से फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति की लार के संपर्क में आने से भी यह संक्रमण दूसरों तक पहुंच सकता है।
किसे है ज्यादा खतरा?
किसिंग डिजीज का खतरा छोटे बच्चों और किशोरों में अधिक रहता है। हालांकि, यह फ्लू या कोल्ड की तरह तेजी से नहीं फैलता और न ही यह यौन संचारित संक्रमण (STI) है। यह मुख्य रूप से संक्रमित लार के संपर्क में आने से फैलता है।
क्या है बचाव?
किसिंग डिजीज का कोई विशेष इलाज नहीं है क्योंकि यह एक वायरल संक्रमण है, जिस पर एंटीबायोटिक्स असर नहीं करतीं। इसलिए इसका इलाज सपोर्टिव ट्रीटमेंट से किया जाता है। आमतौर पर 1 महीने में इसके लक्षण खत्म हो जाते हैं। डॉ. अनुराग के अनुसार, इस बीमारी से बचाव के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
बचाव के तरीके
ओरल और अन्य हाइजीन का विशेष ध्यान रखें।
किसी संक्रमित व्यक्ति के झूठे बर्तन इस्तेमाल न करें।
किसी और का गिलास या खाने-पीने के सामान शेयर न करें।
गले में दर्द हो तो कम बोलें और गुनगुने पानी से गरारे करें।
थकान, बुखार और गले में दर्द जैसे लक्षण दिखें तो विश्राम करें।
हालांकि भारत में इसके मामले कम देखे जाते हैं, लेकिन थोड़ी सावधानी बरतकर इससे बचा जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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