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बारिश में बढ़ जाता है Pink Eye का खतरा , आई स्पेशलिस्ट से जानें इससे बचने का तरीका
Pink Eye In Rainy Season : मानसून में आई इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर कंजक्टिवाइटिस जैसी समस्या इस मौसम में अधिक होती है। कंजक्टिविटिस जिसे पिंक आई भी कहा जाता है। मानसून में अस्पतालों में भी पिंक आई की समस्या के मरीज तेजी से पहुंच रहे हैं।
आइए विस्तार से जानते हैं पिंक आई क्या हैं और इससे बचने के उपाय जरूरी टिप्स क्या हैं? ऐसी ही कुछ सवालों को लेकर हमने भिवाडी स्थित ESIC अस्पताल के आई डिपार्टमेंट की नेत्र विशेषज्ञ रेखा शर्मा से बात की जिन्होंने, इस मौसम में पिंक आई इंफेक्शन से बचने कई जरूरी टिप्स शेयर किए।

कंजंक्टिवाइटिस क्या है?
पिंक आई और कंजंक्टिवाइटिस एक ही चीज हैं। जबकि कंजंक्टिवाइटिस और आईफ्लू एक नहीं होते हैं। पिंक आइज असल में एक मेडिकल कंडिशन है। इसे कंजंक्टिवाइटिस के नाम से भी जाना जाता है। कंजंक्टिवाइटिस को पिंक आइज इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस समस्या में आंख का सफेद रंग वाला हिस्सा गुलाबी या लाल हो जाता है। आमतौर पर उमस के दिनों में यह परेशानी ज्यादा देखने को मिलती हैं।
कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण
- आंखों में लालपन और सूजन
- आंखों से डिस्चार्ज होना और पानी निकलना
- आंखों में चुभन और जलन होना
- आंखों में खुजली
- आंखों और पलकों में कीचड़ जमना।
पिंक आई कैसे एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है?
पिंक आई संक्रमित व्यक्तियों के सांस की बूंदो या संक्रमित वस्तुओं के सीधे संपर्क के माध्यम से फैलती है। यह एक आंख को छूने और फिर दूसरी आंख को छूने से भी फैल सकती है, साथ ही स्विमिंग पूल में तैरने या संक्रमित नेत्र सुरक्षा उत्पादों का उपयोग करने आपको यह इंफेक्शन हो सकता है।

बारिश में ही क्यों बढ़ते हैं पिंक आई के मामले?
मानसून में पिंक आई के मामले बढ़ने की वजह यह भी होती है कि इस मौसम में नमी और आर्द्रता बढ़ जाती है। गर्म और गीले माहौल में बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए पर्याप्त माहौल मिल जाता है जिसमें एडेनोवायरस (adenovirus) भी शामिल है जो वायरल कन्जंक्टाइवाइटिस की मुख्य वजह होता है।
आपको बता दें कि एडेनोवायरस वायरस का एक ऐसा समूह है जो श्वसन संक्रमण और अन्य वायरल बीमारियों की वजह बनते हैं। कुछ एडेनोवायरस के स्ट्रेन कन्जंक्टाइवाइटिस यानी पिंक आई वायरल के कारक होते हैं। यह संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींकने से उत्पन्न श्वसन बूंदों, संक्रमित हाथ और उसके इस्तेमाल की गईवस्तुओं के जरिए फैलता है।
पिंक आई से बचाव
- बाहर से आने पर साबुन और पानी से हाथ जरुर धोएं।
- बार-बार आंखों को छूने से बचें।
- किसी दूसरे का तौलिया, तकिया और आई मेकअप जैसे पर्सनल चीजें यूज न करें और न करने दें।
- आमतौर पर छूए जाने वाले सतह और वस्त्रों को अच्छे से साफ करें जैसे- टेबल, मोबाइल और रूमाल।
- पिंक आई से संक्रमित व्यक्ति से दूर रहे और उसके इस्तेमाल की गई चीजों का इस्तेमाल न करें।
इन बातों का भी ध्यान रखें
- आंखें रगड़ने से बचें, यह आंखों की स्थिति को बढ़ा सकता है।
- ठंडा कंप्रेस से भी आंखों का दर्द कम होता है।
- सालाइन सोल्यूशन से आंखें धोएं।
- सही इलाज के लिए नेत्र चिकित्सक से जांच करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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