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World Rabies Day : रेबीज होने पर शरीर पर कैसे होता है असर, जानें लक्षण और बचाव के तरीके
World Rabies Day : गाजियाबाद में रेबीज की वजह से 14 साल के बच्चे की मौत ने पूरे देश को हिला दिया। इस घटना के वायरल वीडियो में यह किशोर अपने पिता की गोद में दम तोड़ते हुए दिख रहा थाा।
इस घटना ने एक बात साफ कर दी कि लापरवाही की वजह से होने वाली बीमारी कितनी भयानक हो सकती है। अगर उस तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता हैं, तो परिणाम जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।
रेबीज लाइलाज बीमारी है। रेबीज होने पर आज तक कोई नहीं बच सका है। कुत्ते या बिल्ली के काटने को इग्नोर न करें जितना जल्दी हो सकें इसका इलाज लें। आइए सबसे पहले जानते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को रेबीज हो जाए तो क्या होगा? रेबीज के लक्षण क्या है और इलाज के तरीके।

शरीर में क्या असर करता है रेबीज का वायरस?
वायरस इंसानी शरीर में आने के बाद सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है और 3 से 12 हफ्ते में ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड तक पहुंच जाता है। ब्रेन में पहुंचकर वायरस तेजी से बढ़ता है। इसके बाद मरीज को लकवा मार सकता है, वह कोमा में जा सकता है और आखिर में मौत हो जाती है। कभी-कभी रेबीज के लक्षण दिखने में एक साल या उससे अधिक समय भी लग जाता है।
रेबीज होने पर दिखते हैं ये लक्षण
- बुखार
- बदन दर्द
- घाव पर चुभन, जलन या कोई सेंसेशन
कुत्ते के अलावा इन जानवरों से भी हो सकता है रेबीज
यह वायरस सिर्फ मैमल्स यानी स्तनपायी जीवों को ही शिकार बनाता है। स्तनपायी यानी इंसान, कुत्ते, बिल्ली, बंदर, चमगादड़, लोमड़ी, घोड़े जैसे वे सभी जीव, जिनमें मैमरी ग्लैंड पाई जाती है। जिनके बच्चे मां का दूध पीकर बड़े होते हैं। इसमें जंगली जानवरों के साथ ही पालतू पशु भी शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कुत्तों के अलावा चमगादड़ दूसरा ऐसा जानवर है, जिसकी वजह से हजारों मौतें हो सकती हैं।

कुत्ता काटे तो 72 घंटे में एंटी रेबीज इंजेक्शन जरुर लगाएं
किसी अनजान या जंगली जानवर ने आपको काटा हो या खरोंच मारी हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। अगर आपने पालतू कुत्ते, बिल्ली को रेबीज का टीका नहीं लगवाया है और वह काट लेते हैं, तब भी 72 घंटे के अंदर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं। इससे ज्यादा देरी करने पर दवा का असर नहीं होगा।
कुत्ता या बिल्ली काटने पर रखें इस बात का विशेष ख्याल
जिस कुत्ते, बिल्ली, बंदर या किसी दूसरे जानवर ने आपको काटा है, 10 दिन तक उस पर नजर रखें। अगर वह बीमार दिखे या कुछ दिनों में ही मर जाए तो फौरन अपने डॉक्टर को बताएं। उसमें रेबीज के लक्षण दिखें तो जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के हवाले कर दें।

रेबीज से बचाव का प्री और पोस्ट ट्रीटमेंट
कहीं घूमने जा रहे हैं या फिर पशुओं के लिए काम करते हैं, तब रेबीज से बचाव के लिए 'प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस' (PrEP) दवाएं लेनी चाहिए। इसकी 2 डोज रेबीज से 3 साल तक बचाए रखती हैं। किसी संक्रमित पशु के काटने पर 'पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस' (PEP) की डोज दी जाती है, जो वायरस के हमले से बचाती है।
रेबीज पर फैक्ट फाइल
- मेडिकल साइंस के पास 4500 साल पुरानी इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में रेबीज के वजह से 15 साल से नीचे के बच्चों की मृत्यु ज्यादा होती है, उसकी एक वजह बच्चें डांट या पिटाई के डर से घर में इस घटना के बारे में नहीं बताते है।
- रेबीज के वायरस दुनियाभर में हर 10 मिनट में एक व्यक्ति की जान ले रहा है।
- कुछ साल पहले तक कुत्ता काटने पर रेबीज से बचाव के लिए 14 से 16 डोज तक इंजेक्शन लगते थे, लेकिन अब 5 वैक्सीन दी जाती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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