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शरीर पर अधिक तिल, कहीं त्वचा कैंसर का खतरा तो नहीं

एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वेस्टमीड मिलेनियम इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल रिसर्च के ग्राहम मान ने बताया कि इस उत्परिवर्तित जीन को एमआईटीएफ के नाम से जाना जाता है जो आमतौर पर उन लोगों में पाया जाता है जिनके शरीर पर कई तिल होते हैं और जिनके पूर्वज मेलानोमा से ग्रसित रहे होते हैं।
उन्होंने बताया कि कई नमूनों के अध्ययन में पाया गया कि करीब दो लाख आस्टेलियाई नागरिकों में यह जीन मौजूद है। यह शोध विग्यान जर्नल नेचर के हालिया अंक में प्रकाशित किया गया है। मान ने कहा कि यह शोध लोगों के बेहतर उपचार के लिए उम्मीद की एक किरण की तरह है।
उन्होंने कहा कि हम ऐसी उम्मीद करते हैं क्योंकि हम इस बात को समझते हैं कि प्रणाली कैसे काम करती है, इसे सुरक्षित दवा के माध्यम से रोका जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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