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मोबाइल फोन से कैंसर का खतरा नहीं

कोपनहेगन में कैंसर एपिडिमियोलॉजी संस्थान के शोधकर्ताओं ने 18 वर्ष तक 358,000 लोगों पर नजर रखी और पाया कि मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले लोगों में कैंसर होने की दर लगभग वही है, जो मोबाइल नहीं प्रयोग करने वालों में है। इससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि मोबाइल फोन के प्रयोग से मस्तिष्क कैंसर या किसी अन्य कैंसर होने का कोई वास्ता नहीं है। वास्तव में, यह अध्ययन वर्ष 1990 से लेकर 2007 के बीच किया गया, जिसमें शोधकर्ताओं ने मोबाइल फोन प्रयोग करने वाले और नहीं करने वालों लोगों का अध्ययन किया। कुल मिलाकर 10,279 लोगों के मुख्य तंत्रिका तंत्रा में ट्यूमर पाया गया।
जब 13 साल या इससे ज्यादा समय से मोबाइल फोन का प्रयोग कर रहे लोगों पर अध्ययन किया गया तो पता चला कि उनमें भी कैंसर की वही दर है। जहां कुछ विशेषग्यों ने इस खुलासे का स्वागत किया है, वहीं कुछ इस अध्ययन से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि 10 वर्ष या अधिक समय से मोबाइल इस्तेमाल कर रहे लोगों में कैंसर होने की कोई आशंका नहीं है। लेकिन, उन्होंने इससे इंकार नहीं किया कि अगर लंबे समय तक बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है तो इसकी थोड़ी आशंका रहती है। अखबार डेली एक्सप्रेस ने ब्रिटेन में कैंसर रिसर्च संस्थान में एवीडेंस एंड हेल्थ इंफार्मेशन के प्रमुख हाजील नून के हवाले से कहा है, यह अब तक का सबसे बड़ा सबूत है कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से वयस्कों के प्रमुख तंत्रिका तंत्रा या मस्तिष्क में कैंसर होने की आशंका नहीं रहती है।
उधर, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में मानव पर विकिरण के प्रभाव के बारे में अवकाशप्राप्त प्रोफेसर डेलिस डेनसाउ का कहना है, यह अध्ययन लोगों और नीति नियंताओं के लिए छलावे के समान है। मेरी राय में उनका दावा बिल्कुल निराधार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले साल चेताया था कि मोबाइल फोन कैंसर का कारण हो सकता है और इसके सीमित इस्तेमाल की सलाह दी थी।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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