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बच्चों में होने वाले घातक कैंसर
ऐसा माना जाता है कि जब किसी वयस्क को कैंसर होता है तो वह ब्रेस्ट, फेफड़े, प्रोस्टेट या पेट में होता है। परन्तु जब कोई बच्चा इस घातक बीमारी से संक्रमित होता है तो आमतौर पर यह तंत्रिका तंत्र, ब्रेन, हड्डी, मांसपेशियों, किडनी, या कभी कभी रक्त में होता है। बहुत ही कम मामलों में आप देखेंगे कि बच्चों में पाया जाने वाला कैंसर वयस्कों में पाए जाने वाले कैंसर की तरह होता है तथा ऐसी परिस्थिति में मामला और अधिक जटिल हो जाता है। कैंसर एक ऐसी दर्दनाक बीमारी है जिसमें दोनों प्रकार का दर्द होता है – भावनात्मक तथा शारीरिक।
महिलाओं में कैंसर के लक्षण
जब बच्चों को यह घातक बीमारी होती है तथा जब वे अपना दर्द बता नहीं सकते तो ऐसी परिस्थिति में माता पिता के लिए इसे सहन करना अधिक कठिन हो जाता है। यदि आप बच्चों में होने वाले कैंसर के इन आम प्रकारों को देखें तो आप इनके लक्षणों की ओर भी अवश्य ध्यान देंगे। यहाँ हम विश्व भर में बच्चों में पाए जाने वाले कैंसर के प्रकार देखेंगे।
कैंसर के इन विभिन्न प्रकारों के अपने निष्कर्ष, उपचार और कीमोथेरिपी की सहायता से इस बीमारी से बाहर निकलने के अनूठे तरीके हैं। बच्चों में होने वाले कैंसर के विभिन्न प्रकार:

ल्यूकेमिया या ब्लड कैंसर
ब्लड कैंसर भारत के बच्चों में पाया जाने वाला कैंसर का सबसे मुख्य प्रकार है। इस प्रकार के कैंसर में हड्डियों में तथा जोड़ों में दर्द होता है। ल्यूकेमिया के दो सामान्य प्रकार एक्यूट लिम्फोसाइटिक और एक्यूट मेलोजेनस ल्यूकेमिया हैं जो सभी उम्र के बच्चों को हो सकते हैं।

ब्रेन कैंसर
यह बच्चों में पाया जाने वाला कैंसर का दूसरा सबसे सामान्य प्रकार है। ब्रेन में होने वाला ट्यूमर अक्सर ब्रेन के निचले भाग में होता है जैसे सैरिबेलम या ब्रेन स्टैम। ब्रेन कैंसर के लक्षण उल्टी, जी मचलाना और धुंधली दृष्टि हैं।

नेफ्रोब्लास्टोमा
नेफ्रोब्लास्टोमा बच्चों में पाया जाने वाला एक अन्य प्रकार का कैंसर है जो किडनी से प्रारंभ होता है। यह कैंसर सामान्यत: तीन से चार वर्ष की आयु वाले बच्चों में पाया जाता है। इसके लक्षण दर्द, बुखार, जी मचलाना और भूख न लगना है।

बोन कैंसर
बच्चों में पाया जाने वाला एक अन्य कैंसर बोन कैंसर है। बोन कैंसर बोन (हड्डी) से ही प्रारंभ होता है। ये सामान्य रूप से बड़े बच्चों और किशोरों (टीनऐजर्स) में पाया जाता है। मेटास्टेटिक बोन कैंसर जो इस कैंसर का एक अन्य प्रकार है शरीर में अन्य किसी स्थान से प्रारंभ होता है तथा फिर हड्डियों में फैलता है।

न्यूरोब्लास्टोमा
बच्चों में इस प्रकार का कैंसर नर्व सेल (तंत्रिका कोशिका) में प्रारंभ होता है। कभी कभी इस प्रकार का कन्सर तब हो जाता है जब बच्चा मां के पेट में होता है। 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों में यह बहुत कम देखने मिलता है। इसके लक्षण हैं- पेट में पाया जाने वाला ट्यूमर।

इम्यून सिस्टम का कैंसर
लिम्फोमा बच्चों में पाया जाने वाला आम कैंसर है। यह घातक बीमारी पूरे प्रतिरक्षा तंत्र तथा लसिका ऊतकों को प्रभावित करती है। इस प्रकार की कैंसर कोशिकाएं शरीर की ठीक तरह से रक्षा नहीं करती तथा ये प्रतिरक्षा तंत्र के चारों ओर एकत्रित होती हैं।

ठोस ट्यूमर्स (सर्कोमास)
ठोस ट्यूमर एक गाँठ होती है जो बीमार कोशिकाओं के आपस में चिपकने से बनती है। ये ट्यूमर्स बच्चे के शरीर के किसी भी भाग में विकसित हो सकते हैं जिसमें किडनी, ब्रेन, हड्डियां और लीवर शामिल हैं।

कैंसर से बचाव
बच्चे को कैंसर से बचाने के लिए माता पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनका बच्चा संतुलित आहार ले जिसमें सब्जियां तथा फल शामिल हों। खनिज के साथ साथ एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स लेने से शरीर की उन केमिकल्स से रक्षा होती है जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कैंसर से लड़ने के लिए खाद्य पदार्थ
ब्रोकोली, गाजर, मशरूम, लहसुन तथा अन्य पदार्थ कैंसर से लड़ने के लिए उत्कृष्ट पदार्थ है। इन खाद्य पदार्थों के अलावा इन खाद्य पदार्थो को देखें जो कैंसर को दूर रखने में सहायक है।

कैंसर से प्राकृतिक रूप से कैसे लड़ें?
शक्कर कम खाएं, रेड मीट (जैसे मटन, बीफ़) के बजाय बिना चर्बी का मांस खाएं। इसके अलावा कैंसर से प्राकृतिक रूप से लड़ने के अन्य कई तरीके हैं। इन घटक बीमारी से बचने के 20 ऐसे प्राकृतिक तरीके देखें।



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