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पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द का कारण और निदान
पीरियड्स के दिनों में होने वाला दर्द, महिलाओं के लिए सबसे डरावना अनुभव होता है। महीने के उन दिनों में, पेट का निचला हिस्सा काफी दुखता है। पीरियड्स के दिनों में पेट का आकार भी बदल जाता है और उसमें हल्का सा उभार आ जाता है, तीखा दर्द होता है और पांच दिन तक लगातार रक्तस्त्राव होने के कारण, योनि में बहुत गीलापन भी महसूस होता है।
आमतौर पर महिलाओं को सहनीय दर्द होता है जिसमें कोई हल्की डोज वाली खुराक लेने पर आराम मिल जाता है लेकिन कुछ महिलाओं को भयानक दर्द होता है, इस स्थिति को डिस्मेनोरिया कहा जाता है।

जिन महिलाओं को ऐसी समस्या होती है उन्हें कई बार पीरियड्स नहीं होते हैं और अनियमित तरीके से होते हैं। मासिक धर्म के दिनों में, प्रोस्टेग्लैडिंस का स्त्राव होता है जिसकी वजह से दर्द होता है।
मासिक धर्म के दिनों में, गर्भाशय की मांसपेशियां संकुचित अवस्था में आ जाती है ताकि गर्भाशय में भरी हुई पूरी गंदगी, जैसे- गंदा रक्त, एग आदि बाहर निकल जाएं। कई महिलाओं को इन दिनों में उल्टी, थकान, सिरदर्द और डायरिया भी हो जाता है।

पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं। यह साबित हो चुका है कि पीरियड्स में होने वाला दर्द, एंटी-इंफ्लामेट्री कम्पाउंड और प्रो-इंफ्लामेंट्री कम्पाउंड के बीच असंतुलन होने के कारण होता है।
ऐसे में अगर इस दौरान, ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन किया जाएं तो काफी आराम मिलता है। कुछ प्रकार की मछलियों और तेल में यह पाया जाता है।

इसके अलावा, मासिक धर्म के दौरान, विटामिन ई, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन बी1 का सेवन भी दर्द से राहत दिला देता है। 90 प्रतिशत समस्या का समाधान इन सामग्रियों के सेवन मात्र से ही हो जाता है।

अगर किसी भी महिला को काफी दर्द रहता है तो उसे एंटी-इंफ्लामेंट्री दवाओं का सेवन कर लेना चाहिए। यह काफी प्रभावी होती हैं और इससे पेट में होने वाली ऐंठन में भी आराम मिलता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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