Latest Updates
-
दिल्ली में फिर फटा AC: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नहीं, ये 4 बड़ी गलतियां एयर कंडीशनर को बना रही हैं ‘बम'! -
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर
Delayed puberty in girls : लड़कियों में देरी से प्यूबर्टी की हो सकती हैं ये वजह, सेहत पर कैसे पड़ता है असर
जैसे-जैसे लड़की की उम्र बढ़ती है, उसमें प्यूबर्टी के लक्षण विकसित होने लगते हैं। हालांकि, हर लड़की में प्यूबर्टी की उम्र अलग होती है। लेकिन अगर एक लड़की की 13 साल की उम्र तक स्तन विकसित नहीं होते हैं या मासिक धर्म 16 साल की उम्र तक शुरू नहीं होता है। तो इसका अर्थ है कि उसका यौवनास्था का चरण देरी से आ रहा है, जिसे डिले प्यूबर्टी के नाम से भी जाना जाता है। किसी भी महिला में यौवन परिवर्तन तब होता है जब शरीर सेक्स हार्मोन बनाना शुरू कर देता है। ये बदलाव आमतौर पर 8 से 14 साल की उम्र की लड़कियों में दिखाई देने लगते हैं।
लेकिन डिले प्यूबर्टी में या तो लड़की में यह परिवर्तन नहीं होते हैं या फिर अगर वे होते हैं, तो वे सामान्य रूप से प्रगति नहीं करते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम लड़कियों में डिले प्यूबर्टी के कारण और उसके प्रभाव के बारे में बता रहे हैं-

लड़कियों में डिले प्यूबर्टी का क्या कारण है?
• लड़कियों में डिले प्यूबर्टी के कई कारण हो सकते हैं। इसमें सबसे आम कारण होता है माता-पिता से इसका विरासत में मिलना। यह पैटर्न परिवारों में चलता है। ऐसा होने की अधिक संभावना है कि यदि मां में 14 साल की उम्र के बाद प्यूबर्टी में कदम रखा, तो बेटी को डिले प्यूबर्टी का सामना पड़े।
• लड़कियों में डिले प्यूबर्टी का एक प्रमुख कारण शरीर में बॉडी फैट का कम होना है। यह उन लड़कियों में देखा जा सकता है जो बहुत एथलेटिक हैं, खासकर जिमनास्ट, बैले डांसर और प्रतिस्पर्धी तैराकों में। यह एनोरेक्सिया नर्वोसा वाली लड़कियों में भी देखा जा सकता है, जो अत्यधिक डाइटिंग करती हैं और वे असामान्य रूप से पतली होने पर भी बहुत मोटी होने से डरती हैं।
• विलंबित यौवन वाली कुछ लड़कियों को अपने अंडाशय में समस्या हो सकती है। अंडाशय या तो ठीक से विकसित नहीं हो रहे हैं या फिर डैमेज हो रहे हैं। ऐसा जन्म के समय मौजूद टर्नर सिंड्रोम है, जिसमें दो एक्स गुणसूत्रों में से सभी या एक का हिस्सा गायब है। टर्नर सिंड्रोम वाली अधिकांश लड़कियां भी अपनी उम्र के हिसाब से बेहद छोटी होती हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में, छोटे कद के कारण टर्नर सिंड्रोम का निदान 13 साल की उम्र से पहले ही हो जाता है।
• डिले प्यूबर्टी तब भी हो सकती है जब अंडाशय बहुत कम या कोई हार्मोन का उत्पादन नहीं करते हैं। इसे हाइपोगोनाडिज्म कहा जाता है।

लड़कियों में डिले प्यूबर्टी के लक्षण क्या है?
लड़कियों में प्यूबर्टी 8 से 15 साल की उम्र के बीच शुरू होती है। लेकिन डिले प्यूबर्टी होने पर लड़की में कुछ लक्षण नजर आ सकते हैं-
• 13 साल की उम्र तक स्तनों का विकास नहीं होता है
• लड़कियों के प्राइवेट एरिया पर बाल ना आना
• 16 साल की उम्र तक मासिक धर्म शुरू ना होना
• कम हाइट और विकास की धीमी दर
• गर्भाशय कर विकास ना होना
इसके अलावा भी डिले प्यूबर्टी के कारणों के आधार पर अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

डिले प्यूबर्टी को चेक करने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?
लड़की में डिले प्यूबर्टी को जानने के लिए एक्सपर्ट सबसे पहले लड़की की फैमिली हिस्ट्री को चेक किया जाता है। इसके अलावा, एक्सपर्ट बच्चे के बारे में कुछ अन्य चीजें भी पूछ सकता है। जैसे-
• भोजन संबंधी आदतें
• व्यायाम की आदतें
• हेल्थ हिस्ट्री
इसके अलावा, कुछ फिजिकल टेस्ट भी किए जा सकते हैं-

कुछ ग्रोथ हार्मोन, सेक्स हार्मोन और थायराइड हार्मोन के स्तर की जांच के लिए ब्लड टेस्ट
• क्रोमोसोमल एनालाइन
• ट्यूमर के लिए सिर का एमआरआई
• अंडाशय और गर्भाशय का अल्ट्रासाउंड
• हड्डी की उम्र का मूल्यांकन करने के लिए बाएं हाथ और कलाई का एक्स-रे किया जा सकता है ताकि यह देखा जा सके कि हड्डियां परिपक्व हो रही हैं या नहीं। जरूरत पड़ने पर इसे समय के साथ दोहराया जा सकता है।



Click it and Unblock the Notifications