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क्या ऑफिस में सीनियर पोस्ट संभालने वाली महिलाएं दिखाती हैं ज्यादा रौब?
1973 में तीन शोधकर्ताओं जी.एल स्टेंस, टी. ई जयरत्ने और सी. ट्रेविस ने 'क्वीन बी सिंड्रोम’ को महिलाओं में एक बिहेवरियल प्रॉब्लम से संबंधित बताया था। उनके अनुसार इस स्थिति में महिलाएं पॉवर के नशे में चूर होकर अपने जूनियर्स के साथ गलत व्यवहार करने लगती हैं, खासतौर पर अगर उनकी जूनियर महिला हो तो।

इस थ्योरी को आगे बढ़ाते हुए कहा गया है कि “सीनियर पोजीशन पर काम करने वाली महिलाएं ना केवल अपनी जूनियर महिला सहकर्मी को सपोर्ट करने से बचती हैं बल्कि उनके करियर पर भी गलत असर डालने की ताक में रहती हैं।” इस विषय पर बहुत रिसर्च हो चुकी है और इस बात को लेकर सभी की दो राय है। कोई कहता है कि क्वीन बी सिंड्रोम महिलाओं में अकसर देखा जाता है जबकि कुछ लोग इस बात से साफ इनकार करते हैं।

क्या इस सिंड्रोम की वजह से महिलाओं से नहीं बनती
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में किए गए एक अध्ययन के अनुसार "ऑफिस में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में महिला सीनियर पर्सन का ज्यादा गलत व्यवहार देखने को मिलता है।" इसके अलावा जो महिलाएं ज्यादा सफल होती हैं या कार्यक्षेत्र में अपने काम में निपुण होती हैं, वो दूसरी महिला सहकर्मियों के टारगेट पर ज्यादा रहती हैं।

कैसे किया गया अध्ययन
महिलाओं के बारे में इस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पिछले साल यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में शोधकर्ताओं ने तीन स्टडी की। इस स्टडी में काम करने वाली महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही शामिल किया गया था। इन लोगों से इनके सहकर्मियों के बारे में पूछा गया कि क्या वो उन्हें नीचा दिखाते हैं या दूसरों के सामने जानबूझकर उन्हें नजरअंदाज करते हैं।
इस स्टडी के अंत में शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं द्वारा ऐसा करने के मामले पुरुषों की तुलना में ज्यादा थे और इस तरह के व्यवहार से महिला प्रतिभागी ही गुजर रही थीं।

महिला कर्मचारियों में आ सकती है कमी
इस स्टडी के दौरान शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिस कंपनी की सीनियर महिला कर्मचारियों के ‘क्वीन बी सिंड्रोम' की वजह से बाकी महिलाओं को परेशानी आई, उस संस्था में महिला कर्मचारियों की संख्या कम होने का खतरा था। जिन कर्मचारियों ने ऑफिस में लगातार इस समस्या का सामना किया उन्होंने अपने काम से संतुष्ट ना होने की भी बात कही।

सीनियर महिला कर्मचारियों ने किया इनकार
हालांकि, इस थ्योरी से सभी सहमत नहीं हैं, खासतौर पर ऑफिस में काम करने वाली सीनियर महिलाएं। ब्रिटेन की टॉप महिला बॉस एन फ्रैंके का कहना है कि ‘क्वीन बी सिंड्रोम' केवल एक मिथ्या है।
उन्होंने अपनी हालिया किताब ‘क्रिएट जेंडर बैलेंस्ड वर्कप्लेस' में ऑफिस में इस तरह के असंतुलन और इससे लड़ने का हल बताया है। उनके अनुसार इस तरह की स्थिति में ऑफिस में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए कंपनी को नए तरीके अपनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीनियर महिलाओं का अपनी जूनियर महिला कर्मचारियों पर हुकुम चलाने की बात एकदम गलत है।



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