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स्‍पर्म डोनेशन से अलग है एग डोनेशन, जानें कौन कर सकता है और इसकी प्रक्रिया

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असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) में एग डोनेशन आम बात है। प्रक्रिया के दौरान, एक फर्टाइल महिला जिसके अंडाशय में अंडे होते हैं, उन्हें एक ऐसी महिला को दान कर देती है जो गर्भ धारण करने में असमर्थ है। इस प्रक्रिया का लाभ पाकर कई उम्रदराज महिलाएं और जिन्‍हें कंसीव करने में दिक्‍कत आ रही है वो आसानी से मां बनने का सुख पा सकती है। आइए जानते है एग डोनेशन से जुड़ी जरुरी बातें।

एग डोनेशन क्या है?

एग डोनेशन क्या है?

एग डोनेशन में, एक महिला अपना अंडा दान करती है जिसे एक प्रयोगशाला डिश में पुरुष शुक्राणु के साथ निषेचित किया जाता है। निषेचित अंडे को फिर महिला प्राप्तकर्ता के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जहां यह भ्रूण का आकार लेने के लिए बढ़ता है।

कौन एग डोनेट कर सकता है?

कौन एग डोनेट कर सकता है?

एक महिला जो अपने एग डोनेट करना चाहती है उसे एक स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। सामान्य मानदंड शामिल होते हैं:

- युवा-महिलाओं को तब दान करना चाहिए जब वे सबसे अधिक फर्टाइल हों, आमतौर पर 21 से 35 वर्ष की आयु के बीच

- अच्छा शारीरिक स्वास्थ्य और कोई आनुवंशिक विकृति नहीं

- एक स्वस्थ मासिक धर्म चक्र

- अच्छा मानसिक स्वास्थ्य

- कोई हानिकारक आदत नहीं

- एक अक्षुण्ण प्रजनन प्रणाली

- कोई जन्म नियंत्रण प्रत्यारोपण या इंजेक्शन नहीं

- फैमिली हेल्‍थ ह‍िस्‍ट्री में कोई समस्‍या न हो

- भरोसेमंद

- अंडा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए इंजेक्शन से गुजरने को तैयार हो

- कोई भी महिला ज्यादा से ज्यादा छह बार एग डोनेट कर सकती है। डोनेशन के बीच तीन माह का गैप जरूरी।

यह कब किया जाता है?

यह कब किया जाता है?

यदि स्वयं के अंडे से गर्भ धारण करने में असमर्थ हैं तो एक्‍सपर्ट अंडा दान करने की सलाह देते हैं। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि:

- जिनके अंडाशय नहीं हैं या निकाल दिए गए है

- कैंसर के इलाज के दौरान जिनके अंडाशय क्षतिग्रस्त हो गए हैं

- मेनोपोज के बाद

- जिनके एग की क्‍वॉल‍िटी अच्‍छी न हो।

- जिनकी प्रजनन दवाओं या आईवीएफ के कई असफल कोशिश के बाद

- जिसका कई बार बार-बार गर्भपात हो चुका है

- कोई गंभीर आनुवांशिक बीमारी की वजह से गर्भ ठहरने में मुश्किल आ रही हो।

- ऐसे मामलों में, विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) या इंट्रा-साइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) के माध्यम से डोनेट क‍िए गए एग को मेल पार्टनर (या एक दाता के शुक्राणु) के साथ मिलाकर विकासशील भ्रूणों बनाया जाता है। जिसे फिर मां बनने वाली महिला के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

- एग डोनेशन स्पर्म डोनेशन जितना आसान नहीं है, लेकिन यह एक आसान प्रक्रिया है जिसके लिए डोनर से कुछ मात्रा में प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। एग डोनर को भी भारतीय कानून द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होता है।

एग डोनेशन और आईवीएफ के बीच अंतर

एग डोनेशन और आईवीएफ के बीच अंतर

आईवीएफ और एग डोनेशन का इस्तेमाल दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। लेकिन क्योंकि दोनों अक्सर एक महिला को गर्भ धारण करने के लिए आवश्यक होते हैं, वे अक्सर एक दूसरे के स्थान पर उपयोग किए जाते हैं।

यदि किसी महिला के स्वस्थ अंडे हैं, तो वह आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान अपने अंडे का उपयोग कर सकती है।

यदि किसी महिला के स्वस्थ अंडे हैं, तो वह आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान अपने अंडे का उपयोग कर सकती है।

यदि एक माँ के पास अस्वस्थ या अनुपस्थित अंडे हैं, तो वह आईवीएफ के माध्यम से अपने साथी के शुक्राणु के साथ एक दाता के अंडे को निषेचित करने का विकल्प चुन सकती है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की निगरानी में हो डोनेशन

- इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एग डोनेशन में करीब 8% महिलाओं की मौत हो जाती है। इसलिए डोनर महिला के पति को जानकारी जरूर दी जानी चाहिए। यह प्रॉसेस बहुत सावधानीपूर्वक अच्छे लैब में होनी चाहिए। जरूरत से ज्यादा एग डोनेट करने वाली महिला को परेशानी हो सकती है। महिला को एलर्जी, यूटरस में सूजन, पेट में दर्द और प्रक्रिया में लापरवाही पर डोनर की जान पर बन सकती है।

English summary

Things You Need to Know Before Donating Your Eggs in Hindi

Egg donation is common in assisted reproductive technologies. Here are the things you need to know before Donating Your Eggs in Hindi. Read on.
Story first published: Tuesday, January 11, 2022, 17:20 [IST]