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World Malaria Day 2026: मलेरिया की जांच के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं? जानें कब टेस्ट करवाना होता है जरूरी
Test For Malaria: मलेरिया एक खतरनाक संक्रामक बीमारी है, प्लाज़्मोडियम नामक परजीवी से संक्रमित मच्छर के काटने से होती है। ठंड लगना, बुखार, खांसी, कमजोरी, उल्टी और मांसपेशियों में दर्द आदि मलेरिया के आम लक्षण हैं। कई बार मलेरिया के लक्षण सामान्य बुखार जैसे लगते हैं, जिससे लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सही समय पर जांच और इलाज न हो तो यह गंभीर रूप ले सकता है। हर साल 25 अप्रैल के दिन विश्व मलेरिया दिवस (World Malaria Day 2026) के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मलेरिया के प्रति जागरूक करके इसकी रोकथाम करना है। हर साल लाखों लोग मलेरिया के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। इसलिए मलेरिया की पुष्टि के लिए सही समय पर टेस्ट (Test For Malaria) कराना बेहद जरूरी होता है। आइए, गुरुग्राम स्थित नारायणा हॉस्पिटल, के सीनियर कंसल्टेंट और इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ। पी। वेंकट कृष्णन से जानते हैं कि मलेरिया का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं -

ब्लड स्मियर टेस्ट
मलेरिया की पहचान के लिए ब्लड स्मियर टेस्ट करवाया जा सकता है। यह एक माइक्रोस्कोपिक टेस्ट है। इसमें मरीज के खून की पतली और मोटी परत बनाकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। इससे यह पता चल जाता है कि खून में मलेरिया के परजीवी मौजूद हैं या नहीं और अगर हैं तो किस प्रकार के हैं, जैसे फाल्सीपेरम या विवैक्स। यह मलेरिया की जांच का सबसे पुराना और भरोसेमंद तरीका है।
रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT)
रैपिड टेस्ट मलेरिया की जल्दी पहचान के लिए किया जाता है। इसमें मरीज के खून की कुछ बूंदों से परजीवी के एंटीजन का पता लगाया जाता है। इस टेस्ट की खास बात यह है कि इसकी रिपोर्ट सिर्फ 15-20 मिनट में मिल जाती है। यह टेस्ट उन जगहों पर ज्यादा उपयोगी है, जहां लैब की सुविधा कम होती है। रैपिड टेस्ट फाल्सीपेरम और विवैक्स मलेरिया की पहचान में सहायक होता है, लेकिन यह परजीवी की संख्या या बीमारी की गंभीरता के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं देता।
पीसीआर टेस्ट (PCR Test)
जब मलेरिया बार-बार हो रहा हो या इलाज के बाद भी लक्षण खत्म न हों, तब पीसीआर टेस्ट किया जाता है। यह एक आधुनिक और बहुत सटीक जांच है, जिसमें खून में मौजूद परजीवी के डीएनए की पहचान की जाती है। पीसीआर टेस्ट बहुत कम मात्रा में मौजूद परजीवी को भी पकड़ सकता है, इसलिए इसे सबसे सटीक टेस्ट माना जाता है। हालांकि, यह टेस्ट महंगा होता है और यह हर जगह उपलब्ध नहीं होता।
कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC)
सीबीसी टेस्ट से खून में हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स की मात्रा का पता चलता है। चूंकि, मलेरिया में अक्सर प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। ऐसे में, डॉक्टर सीबीसी जांच करवाने की सलाह देते हैं।
मलेरिया का टेस्ट कब कराना चाहिए?
अगर आपको तेज बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी, सिरदर्द और ज्यादा पसीना आ रहा है, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
खासकर अगर आप मच्छरों वाले क्षेत्र में रहते हैं या हाल ही में ऐसी जगह गए हैं, तो आपको तुरंत टेस्ट करवाना चाहिए।
कई बार पहली जांच में मलेरिया नहीं दिखता, इसलिए डॉक्टर 24-48 घंटे बाद दोबारा टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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