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जानिए, गार्डनिंग के लिए कैसे तैयार करें कंटेनर
गार्डनिंग करना हम सभी को अच्छा लगता है। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि जो लोग गार्डनिंग में नए होते हैं, उनके पौधे जल्दी सड़ जाते हैं या खराब हो जाते हैं। वहीं, कुछ लोगों के पौधों ठीक तरह से विकसित ही नहीं होते हैं। ऐसे में उन्हें समझ में नहीं आता है कि वास्तव में गड़बड़ कहां हो रही है। दरअसल, गार्डनिंग का सबसे पहला स्टेप होता है कंटेनर में प्लांटिंग करना। इसके लिए पहले कंटेनर या प्लांटर को तैयार करना होता है। चूंकि इन दिनों मार्केट में सिर्फ मिट्टी के गमले नहीं मिलते, बल्कि सीमेंट से लेकर प्लास्टिक तक के गमलों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका वजन भी अलग-अलग होता है और इसी के आधार पर इन्हें तैयार किया जाता है। अगर गमले को सही तरह से फिल किया जाए तो पौधों की अच्छी बढ़त की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। तो चलिए आज हम आपको अलग-अलग कंटेनर को तैयार करने के तरीके के बारे में बता रहे हैं-

मिट्टी का गमला
मिट्टी का गमला आमतौर पर हैवी होता है और इसे एक अलग तरह से तैयार किया जाता है। इसके लिए आप पहले एक खाली गमला लें और उसके नीचे वाले छेद के उपर मिट्टी के दीए को उल्टा रख लें। अब आप इसके उपर ईटों के टुकड़े डालें। यह ईटों के टुकड़े मिट्टी के दीए की हाइट से उपर तक होने चाहिए। अब आपको इसके उपर एक लेयर और बनानी है, जिसे मॉइश्चर लेयर भी कहा जाता है। इसमें आप सूखे पत्ते या नारियल का उपरी छिलका डाल सकते हैं। यह लेयर मिट्टी को उपर होल्ड करके रखती है और वहीं नमी के कारण सबसे निचले हिस्से में ठंडक और नमी बनी रहती है, जो आपके पौधों के लिए आवश्यक है। साथ ही साथ धीरे-धीरे सूखे पत्ते कंपोस्ट बन जाएंगे, जिससे आपके पौधों को आहार मिलता रहेगा। अब आप इसके उपर मिक्स सॉयल मसलन, इसमें सॉयल के साथ-साथ गोबर की खाद, कंपोस्ट, कोयले का चूरा, राख व रेत आदि मिक्स करें। इसे आप अपनी मिटृटी के गमले को भरे। आपका मिट्टी का गमला तैयार है। आप इसी तरह टेराकोटा या सीमेंट के गमले को भी तैयार कर सकती हैं।

प्लास्टिक का गमला
प्लास्टिक के गमले को हमेशा उसके नीचे की प्लेट में ही रखें। इसमें आपको दीया आदि रखने की आवश्यकता नहीं है। आप इस पर सबसे पहले क्ले बॉल्स रखें। आपकी एक थिक लेयर बनाएं ताकि गमले के मिड पोर्शन पर यह आ जाए। अब आप इस पर नारियल का छिलका डालें। अब आप इसमें मिट्टी डालें। ध्यान रखें कि इस मिट्टी में थोड़ा कोकोपीट अवश्य डालें। ध्यान रखें कि प्लास्टिक या सिरेमिक गमलों में तीस से चालीस प्रतिशत कोकोपीट का होना अवश्य है। इससे मिट्टी हल्की रहेगी और वाटर ड्रेनेज भी सही होगा। वहीं, रूट्स को भी ऑक्सीजन मिलता रहेगा। इस तरह आपका प्लास्टिक का गमला तैयार है।

ग्रो बैग्स
चूंकि ग्रो बैग्स सबसे हल्के होते हैं, इसलिए आप इसमें जो भी लेयर तैयार करेंगे, वह सबसे हल्का होना चाहिए। ग्रो बैग्स में ड्रेन लेयर बनाते समय इसमें सबसे पहले प्यूमिस स्टोन्स डालें। ध्यान रखें कि इसमें कभी भी ईटों के टुकड़ों का इस्तेमाल ना करें। अब आप इसमें सूखे पत्ते व नारियल के छिलके डालें। अब इसमें कोकोपीट व मिट्टी को मिक्स करके इससे ग्रो बैग्स को भरें। आपको ग्रो बैग्स बनकर तैयार है।



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