आषाढ़ महीने में क्यों है रोमांस की मनाही, जानें पति-पत्नी क्यों नहीं बनाते हैं फिजिकल रिलेशन

Ashadha Month Rules for Couples: भारतीय संस्कृति में हर परंपरा और रीति-रिवाज का एक खास कारण होता है। आषाढ़ मास को शून्य मास भी कहा जाता है, जिसे अशुभ माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। मान्यता है कि नवविवाहिता को अपनी शिक्षा पूरी होने तक ससुराल में नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने मायके लौट जाना चाहिए।

कवियों द्वारा मानसून के मौसम को अक्सर रोमांटिक बताया जाता है, जो कहते हैं कि इस समय प्यार खिलता है। हालाँकि, यह सलाह दी जाती है कि पति-पत्नी आषाढ़ के दौरान शारीरिक संबंध बनाने से बचें। यह सलाह परंपरा और स्वास्थ्य संबंधी विचारों को ध्यान में रखकर कह गयी है।

Ashadha Month Rules for Couples Why cant husband and wife be together in ashada maas

आषाढ़ माह का धार्मिक महत्व

आषाढ़ को बहुत धार्मिक महीना माना जाता है। भक्त भगवान शिव की पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होते हैं। इस दौरान कई लोग व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और ध्यान करते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले शारीरिक संबंध बनाना वर्जित है, यही वजह है कि जोड़ों को आषाढ़ के दौरान अंतरंगता से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

सेंट्रल यूरोपियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी ने लिखा है कि मौसमी परिवर्तन पुरुषों में लिंग अंतर और महिलाओं में हार्मोन के स्तर को प्रभावित करते हैं। मानसून नमी, चिपचिपाहट और गंदगी लाता है, जिससे यह शारीरिक अंतरंगता के लिए एक असहज समय बन जाता है।

मानसून के दौरान स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ

मानसून का मौसम कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी लेकर आता है। नमी बढ़ने से स्वच्छता संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें महिलाओं में मूत्र मार्ग संक्रमण (यूटीआई) की अधिक घटनाएं शामिल हैं। बारिश के पानी में अक्सर बैक्टीरिया होते हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

मौसमी भावात्मक विकार (एसएडी) भी मानसून के दौरान सूरज की रोशनी की कमी और सामाजिक मेलजोल में कमी के कारण हो सकता है। यह विकार शरीर की आंतरिक घड़ी और मूड को नियंत्रित करने वाले हार्मोन जैसे मेलाटोनिन और सेरोटोनिन को प्रभावित करता है।

नींद और मनोदशा पर प्रभाव

मानसून के दौरान सूरज की रोशनी की कमी से नींद का चक्र प्रभावित होता है और मूड संबंधी विकार बढ़ जाते हैं। सूरज की रोशनी मूड को समायोजित करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर को नियंत्रित करने में मदद करती है; इसके बिना, लोगों को चिंता और अवसाद का अनुभव हो सकता है।

मानसून के दौरान नमी बढ़ने के कारण स्वच्छता संबंधी समस्याएं और भी गंभीर हो जाती हैं। यह वातावरण बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे संक्रमण और बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।

इन कारकों को देखते हुए - धार्मिक रीति-रिवाज, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं, और मनोदशा पर प्रभाव - यह माना जाता है कि बरसात के मौसम में जोड़ों के लिए शारीरिक संबंध बनाना अनुचित है।

इस पारंपरिक सलाह का उद्देश्य आषाढ़ माह के दौरान आध्यात्मिक शुद्धता और शारीरिक कल्याण दोनों को सुनिश्चित करना है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Desktop Bottom Promotion