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Ayodhya Ram Mandir: राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए आखिर क्यों चुनी गयी 22 जनवरी की तारीख, जानें इसका महत्व
Ayodhya Ram Mandir Pran Pratishtha Date: नए साल की शुरुआत हमेशा उत्साह और उम्मीदों से भरी होती है। भारत के युवाओं के लिए, जनवरी न केवल नई शुरुआत के बारे में है, बल्कि इसका ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व भी है। लोगों का मानना है कि यह माह उनके जीवन को प्रभावित कर सकता है।
वहीं 22 जनवरी 2024 को दोपहर 12:20 बजे नवनिर्मित अयोध्या राम मंदिर में राम लला की प्रतिष्ठा समारोह या प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होने वाला है। यह धार्मिक दृष्टिकोण से सिर्फ एक मील का पत्थर नहीं है, बल्कि देश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में यह अंकित हो जाएगा। इस विशेष कार्यक्रम के 22 जनवरी की तारीख चुनी गयी है और अब लोगों को यह बात जानने की उत्सुकता है कि आखिर इस दिन में ऐसा क्या ख़ास है।

प्राण प्रतिष्ठा के लिए शुभ तिथि और समय
शुभ मृगशिरा नक्षत्र सोमवार (जनवरी 22, 2024) को सुबह 3:52 बजे शुरू होगा और 23 जनवरी, 2024 (मंगलवार) को सुबह 4:58 बजे तक रहेगा। इस खगोलीय घटना को राम लला की मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए अनुकूल माना जा रहा है। 22 जनवरी 2024 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक है।
मृगशिरा नक्षत्र
मृगशिरा को मृगशिरा या मृगशीर्ष भी कहा जाता है, यह हिंदू ज्योतिष में 27 नक्षत्रों में से एक है। यह नक्षत्र वृषभ राशि के अंतर्गत आता है और 23.20 डिग्री वृषभ से 6.40 डिग्री मिथुन तक फैला हुआ है। यह ओरियन तारामंडल में चमकीले तारे एल्डेबारन द्वारा दर्शाया गया है।
शब्द "मृगशिरा" संस्कृत के शब्द "मृग" से बना है, जिसका अर्थ है हिरण या चिकारा, और "शिरा", जिसका अर्थ है सिर। इसलिए, मृगशिरा का अनुवाद "हिरण का सिर" या "हिरण-सिर वाला" के रूप में किया जा सकता है।
मृगशिरा नक्षत्र के देवता सोम, चंद्र देवता हैं। चंद्र प्रभाव इस नक्षत्र से जुड़ी विशेषताओं में भावनात्मक गहराई और संवेदनशीलता जोड़ता है। मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी ग्रह मंगल को माना जाता है। माना जाता है कि मंगल का प्रभाव इस नक्षत्र के तहत पैदा हुए व्यक्तियों में ऊर्जा, दृढ़ता और अन्वेषण की इच्छा जैसे गुणों का योगदान देता है।
इस नक्षत्र को हिंदू धर्म में कई अनुष्ठानों के लिए शुभ माना जाता है और इसका सकारात्मक प्रभाव 22 जनवरी 2024 से शुरू होगा और 23 जनवरी 2024 की सुबह तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त हिंदू धर्म में एक विशेष और शुभ अवधि है। इसे महत्वपूर्ण समारोहों, अनुष्ठानों और प्रयासों को करने के लिए अत्यधिक अनुकूल माना जाता है। यह प्रत्येक दिन 48 मिनट की अवधि है, जिसे सौर दोपहर से पहले 24 मिनट और सौर दोपहर के बाद 24 मिनट में विभाजित किया गया है। सौर दोपहर वह समय है जब सूर्य किसी विशेष स्थान के लिए आकाश में अपने उच्चतम बिंदु पर होता है।
"अभिजीत" नाम का अर्थ "विजयी" या "शुभ" है, और ऐसा माना जाता है कि इस मुहूर्त के दौरान शुरू की गई गतिविधियों में सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध अभिजित मुहूर्त में ही किया था। इसलिए, यह मुहूर्त उस समय मौजूद सभी दोषों को दूर करने और सकारात्मक परिणाम लाने से जुड़ा है। साथ ही इस मुहूर्त के तहत सभी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा सकते हैं।
इसके अलावा मृगशिरा नक्षत्र काल में अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है। इसके अलावा, सोमवार को मृगशिरा नक्षत्र का विशेष महत्व है और इसलिए, 22 जनवरी का दिन श्री राम के अभिषेक समारोह के लिए एक आदर्श तिथि है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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