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Bakrid 2023: इस्लाम में किन लोगों के लिए ज़रूरी है कुर्बानी करना? जानें ईद उल अजहा के रूल्स
Bakrid 2023-ईद-उल अजहा का त्यौहार मुसलमानों के सबसे बड़े त्यौहारों में से एक है। इसे बकरा ईद भी कहते हैं। बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन अल्लाह की राह में जावनरों की कुर्बानी करते हैं। इस्लामिक लूनर कैलेंडर क अनुसार, ईद उल अजहा 12वें महीने की 10 तारीख को मनाया जाता है।

इस बार ईद-उल-अजहा भारत में 29 जून को सेलिब्रेट किया जाएगा। लेकिन मुसलमानों के लिए कुर्बानी के कुछ रूल्स होते हैं, जिन्हें फॉलो करना जरूरी होता है। ये भी जानना जरूरी है कि कुर्बानी करवाना किस पर फर्ज है, ये भी आपको पता होना चाहिए-

अगर आपको कुर्बानी के रूल्स के बारें में नहीं पता है तो आपको ये जानना चाहिए। सब से पहले तो ये समझे कि कुर्बानी भी अल्लाह पाक की एक इबादत है, हजरत मोहम्मद ( ﷺ) की हदीस है कि कुर्बानी के दिनों में अल्लाह को कुर्बानी से ज्यादा कोई अम्ल प्यारा नहीं है।
कुर्बानी किस पर वाजिब है
कुर्बानी हर उस मुसलमान पर फर्ज है जो कुर्बानी के दिनों में शरई तरीके से शाहिबे निशाब ( फाइनेंशली मजबूत हों), शाहिबे निशाब हर उस शख्स को कहा जाता जिसके पास इतना रुपये हो जितने में साढ़े बावन तोला चांदी हो है या फिर साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े बावन तोला चांदी की कीमत के बराबर गोल्ड हो, इसके साथ ही बिजनेस में इतना पैसा हो कि वो साढ़े बावन तोला चांदी का मालिक जाए। उस पर कुर्बानी वाजिब है।

कुर्बानी वाजिब होने की कितनी शर्ते हैं?
जिन पर कुर्बानी वाजिब होती है उनके ऊपर 5 शर्ते लगती है।
1.उसे बालिग़ होना चाहिए।
2.शाहिबे निशाब होना जरूरी है।
3.कुर्बानी करने वाला मुसलमान होना चाहिए।
4.कुर्बानी करने वाला सफर में नहीं होना चाहिए।
5.कुर्बानी करवाने वाला अक्ल मंद हों पागल पर कुर्बानी वाजिब नहीं है।

कितना महंगा बकरा कुर्बानी के लिए ले सकते हैं ?
मुसलमान अपनी हैसियते निसाब के मुताबिक, सस्ते या महंगे किसी भी कीमत के जानवरों पर कुर्बानी करवा सकते हैं। कुर्बानी का जानवरों की कीमत से मतलब नहीं होता है।
कौन से जानवर की कुर्बानी पर कितने होते हैं हिस्से ?
बकरे जैसे जानवर पर सिर्फ एक नाम से कुर्बानी होती है। वहीं बड़े जानवर जैसे भैंस और ऊंट पर सात लोगों का हिस्सा होता है।

कुर्बानी के मीट को कैसे किया जाता है डिस्ट्रीब्यूट
कुर्बानी के गोश्त को इस्लाम के मुताबिक तीन हिस्सों में बांटते हैं। इसमें एक हिस्सा अपने परिवार के लिए, एक हिस्सा रिश्तेदारों के लिए और एक हिस्से को गरीबों में बांटा जाता है। गरीबों को कुर्बानी का गोश्त इसलिए बांटा जाता है कि त्यौहार पर कोई गरीब गोश्त से महरूम न हो, और लोग अच्छे से फेस्टिवल मना सके।
Image Courtesy- pinterest.com



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