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Navratri Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती
Chaitra Navratri 2027 Day 7 Kalratri Puja: नवरात्रि का सातवां दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि विधि-विधान से उनकी आराधना करने पर नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को साहस, शक्ति और सुरक्षा प्रदान करती हैं। उनके इस स्वरूप की पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और विशेष सिद्धियों की प्राप्ति भी होती है। यही कारण है कि तंत्र-मंत्र साधना में भी मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मां कालरात्रि को शुभंकरी, महायोगेश्वरी और महायोगिनी जैसे नामों से भी जाना जाता है। आइए, जानते हैं नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती के बारे में -
मां कालरात्रि का स्वरूप
मां दुर्गा का सातवां स्वरूप कालरात्रि बेहद उग्र और प्रभावशाली माना जाता है। उनका रंग गहरा काला है, जो अज्ञान और अंधकार के नाश का प्रतीक माना जाता है। माता के लंबे और बिखरे हुए केश चारों दिशाओं में फैले रहते हैं, जो उनकी शक्ति को दर्शाते हैं, मां कालरात्रि की चार भुजाएं और तीन नेत्र होते हैं। उनके तीनों नेत्र ब्रह्मांड की तीनों अवस्थाओं भूत, वर्तमान और भविष्य का प्रतीक माने जाते हैं। उनकी सवारी गदर्भ (गधा) है। माता के एक हाथ में खड्ग (तलवार) और दूसरे में कांटा (लोहे का अस्त्र) होता है, जबकि बाकी दो हाथ वर मुद्रा और अभय मुद्रा में रहते हैं, जिससे वे अपने भक्तों को आशीर्वाद और निर्भयता प्रदान करती हैं। ऐसी मान्यता है कि मां कालरात्रि की आंखों से अग्नि के समान तेज निकलता है, जो बुरी शक्तियों का नाश करता है। उनका यह भयंकर स्वरूप होते हुए भी वे अपने भक्तों के लिए शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।

मां कालरात्रि की पूजा विधि
नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा सुबह और शाम दोनों समय करना शुभ माना जाता है। पूजा शुरू करने से पहले स्थान को साफ करके वहां गंगाजल छिड़कें। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अब देवी के सामने घी का दीपक जलाएं और रोली, अक्षत व गुड़हल के फूल अर्पित करें। यदि आप अग्यारी (धूप/हवन) करते हैं, तो लौंग, बताशा, गुग्गल और हवन सामग्री भी अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद श्रद्धा से मां के जयकारे लगाएं और उन्हें गुड़ का भोग लगाएं। पूजा के अंत में कपूर जलाकर पूरे परिवार के साथ माता की आरती करें। शाम के समय आरती के बाद आप दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं और मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करें। मान्यता है कि लाल चंदन की माला से मंत्र जाप करना अधिक शुभ होता है, लेकिन यदि यह संभव न हो तो रुद्राक्ष की माला का उपयोग भी किया जा सकता है।
मां कालरात्रि का प्रिय भोग
सप्तमी तिथि के दिन मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। आप उन्हें मालपुआ का भोग भी लगा सकते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से भोग लगाने पर मां कालरात्रि प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है
मां कालरात्रि का मंत्र
ओम कालरात्र्यै नम:।
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि,
जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तुते।
ओम ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी,
एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ओम।
मां कालरात्रि की आरती
कालरात्रि जय-जय-महाकाली,
काल के मुह से बचाने वाली।
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा,
महाचंडी तेरा अवतार।
पृथ्वी और आकाश पे सारा,
महाकाली है तेरा पसारा।
खडग खप्पर रखने वाली,
दुष्टों का लहू चखने वाली।
कलकत्ता स्थान तुम्हारा,
सब जगह देखूं तेरा नजारा।
सभी देवता सब नर-नारी,
गावें स्तुति सभी तुम्हारी।
रक्तदंता और अन्नपूर्णा,
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना।
ना कोई चिंता रहे बीमारी,
ना कोई गम ना संकट भारी।
उस पर कभी कष्ट ना आवें,
महाकाली मां जिसे बचाबे।
तू भी भक्त प्रेम से कह,
कालरात्रि मां तेरी जय।



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