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IVF vs Surrogacy दोनों में क्या है अंतर? संभावना सेठ के मां बनने की खबर के बाद बढ़ी चर्चा
Sambhavna Seth Announce Pregnancy: संभावना सेठ की मां बनने की खबरों ने उनके फैंस को खुश कर दिया है। साल 2026 में मनोरंजन इंडस्ट्री से एक के बाद एक गुड न्यूज आ रही है। पहले दिव्यांका त्रिपाठी फिर दीपिका पादुकोण और अब संभावना सेठ ने अपनी प्रेग्नेंसी अनाउंस कर दी है। 'बिग बॉस' फेम संभावना सेठ (Sambhavna Seth) के घर भी शादी के 10 साल बाद किलकारियां गूंजने वाली हैं। 45 की उम्र में मां बनने का सपना देख रही संभावना और उनके पति अविनाश द्विवेदी ने सोशल मीडिया पर इस गुड न्यूज को साझा किया है। लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं था। 4 बार असफल IVF (In-Vitro Fertilization), अनगिनत इंजेक्शनों का दर्द और भावनात्मक उतार-चढ़ाव झेलने के बाद कपल ने आखिरकार सरोगेसी (Surrogacy) का रास्ता चुना है। प्यार, उम्मीद और विज्ञान के संगम से मिली इस खुशी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मां बनने के लिए उम्र सिर्फ एक नंबर है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों संभावना ने IVF के बजाय सरोगेसी को चुना और 40 के बाद इसके क्या फायदे और चुनौतियां हैं।

शादी के 10 साल बाद मां बनने वाली हैं संभावना सेठ
संभावना और अविनाश की शादी को एक दशक बीत चुका है। संभावना ने अक्सर अपने व्लॉग्स में बताया है कि उन्होंने कई बार IVF का सहारा लिया, लेकिन हर बार उन्हें विफलता ही हाथ लगी। 45 की उम्र में शारीरिक जटिलताओं और हार्मोनल बदलावों के कारण गर्भधारण करना मुश्किल हो गया था, जिसके बाद कपल ने सरोगेसी के जरिए माता-पिता बनने का साहसी फैसला लिया।
IVF vs Surrogacy दोनों में से क्या बेहतर है?
अक्सर लोग इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच भ्रमित हो जाते हैं। आसान भाषा में इनका अंतर इस प्रकार है:
IVF (In-Vitro Fertilization): इसमें महिला के अंडे और पुरुष के स्पर्म को लैब में फर्टिलाइज कर भ्रूण (Embryo) बनाया जाता है और फिर उसे मां के अपने गर्भाशय में ही इम्प्लांट किया जाता है।
सरोगेसी (Surrogacy): इसमें भ्रूण तो माता-पिता का ही होता है, लेकिन उसे नौ महीने तक किसी दूसरी महिला (Surrogate Mother) के गर्भाशय में पाला जाता है। संभावना सेठ के केस में उम्र और स्वास्थ्य कारणों से सरोगेसी को अधिक सुरक्षित माना गया।
45 की उम्र में मां बनने के फायदे और नुकसान
45 की उम्र में मां बनने के फायदे
शारीरिक राहत: बढ़ती उम्र में प्रेग्नेंसी का बोझ उठाना महिला के दिल और किडनी के लिए जोखिम भरा हो सकता है, जिससे सरोगेसी बचाती है।
स्वस्थ शिशु: सरोगेसी के जरिए क्रोमोसोमल असामान्यताओं का खतरा कम हो जाता है।
करियर और मैच्योरिटी: 40 के बाद माता-पिता आर्थिक और मानसिक रूप से अधिक स्थिर होते हैं।
45 की उम्र में मां बनने के नुकसान
भावनात्मक जुड़ाव: कई बार माता-पिता को गर्भ में बच्चे को न महसूस कर पाने का भावनात्मक मलाल रहता है।
कानूनी जटिलता: भारत में सरोगेसी के नियम अब काफी सख्त हो गए हैं (Altruistic Surrogacy), जिसके लिए कई कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
एनर्जी लेवल: 45 के बाद छोटे बच्चे की परवरिश के लिए जिस ऊर्जा की जरूरत होती है, वह चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
भारत में सरोगेसी कानून 2026: क्या कहता है नियम?
भारत में अब कमर्शियल सरोगेसी पूरी तरह प्रतिबंधित है। नए नियमों के अनुसार, केवल 'परोपकारी सरोगेसी' (Altruistic Surrogacy) की अनुमति है, जहां सरोगेट मदर को कोई पैसा नहीं दिया जाता (मेडिकल खर्चों के अलावा)। साथ ही, कपल के पास मेडिकल सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है जो यह साबित करे कि वे प्राकृतिक रूप से मां-बाप नहीं बन सकते।



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