Latest Updates
-
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं -
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी
चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन होती है मां स्कंदमाता की पूजा, जानें भोग, आरती और मंत्र
Navratri 2024 Day 5 : 2 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। मां दुर्गा का यह रूप ममता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और माता अपने भक्तों के बच्चों को दीर्घायु होने का आशीर्वाद देती हैं।
भगवती पुराण के अनुसार, स्कंदमाता की पूजा से ज्ञान, शांति, और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह देवी ज्ञान, इच्छाशक्ति और कर्म का समन्वय मानी जाती हैं। मान्यता है कि जब शिव तत्व और शक्ति का मिलन होता है, तब स्कंद अर्थात कार्तिकेय का जन्म होता है। आइए, जानते हैं स्कंदमाता की पूजा-विधि, भोग, मंत्र और आरती।

स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता चार भुजाओं वाली देवी हैं। इनके एक हाथ में कमल, दूसरे में स्कंद (कार्तिकेय), तीसरे में अभय मुद्रा और चौथे हाथ में वर मुद्रा होती है। माता सिंह पर सवार रहती हैं और उनका वाहन सिंह और कमल पुष्प दोनों हैं।
स्कंदमाता की पूजा-विधि
पूजन स्थल की सफाई करें और जहां कलश स्थापना की गई है, वहां माता स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
माता को स्नान कराएं और चंदन, कुमकुम व अक्षत अर्पित करें।
मां को फूल, फल और मिष्ठान अर्पित करें।
माता को धूप और घी का दीप दिखाएं।
मां स्कंदमाता की आरती करें और उनकी स्तुति करें।
अंत में प्रसाद का वितरण करें और माता का आशीर्वाद लें।
स्कंदमाता को अर्पित करने योग्य भोग
मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए उन्हें केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि केले का भोग अर्पित करने से माता अपने भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
स्कंदमाता के मंत्र
- स्कंदमाता ध्यान मंत्र
"सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥"
- स्कंदमाता स्तुति मंत्र
"या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥
तेरी जोत जलाता रहू मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥
कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥
कहीं पहाड़ों पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥
भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥
इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥
दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस पुजाने आयी॥
स्कंदमाता की पूजा का महत्व
मां स्कंदमाता की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि, संतान सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इनकी कृपा से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं, और वे सफलता प्राप्त करते हैं।
चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मां स्कंदमाता की पूजा कर सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें। जय माता दी!



Click it and Unblock the Notifications
