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Chandra Grahan 2023: गर्भ में पल रहे बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए गर्भवती महिलाएं क्या करें?
वैसे तो चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना मात्र है। यह एक खगोलीय स्थिति है जिसमें चन्द्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे आ जाता है और पृथ्वी की छाया उसपर पड़ती है। ऐसा तभी हो सकता है जब चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य एक सीधी रेखा पर स्थित हो जाए और सूर्य की रोशनी से पृथ्वी की छाया बने जिससे चन्द्रमा आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाए।
विज्ञान के हिसाब से ये एक खगोलीय घटना है जिसका कोई कुप्रभाव से संबंध नहीं है लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण में ग्रहण का वृहद् अर्थ है। चंद्रहण अपनी विशेष स्थिति की वजह से शुभ नहीं माना जाता है।

चन्द्रमा की शक्ति से पृथ्वी का हर जीवन प्रभावित होता है इसलिए ऐसी मान्यता है कि ग्रहण की वजह से नकारात्मक शक्तिया हावी हो जाती हैं और जीवों पर कुप्रभाव पड़ सकता है। इसका सबसे चर्चित प्रभाव पड़ता है अजन्मे शिशु पर।
ज्योतिष के हिसाब से चंद्रग्रहण के दौरान गर्भधारण किये स्त्री को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए अन्यथा इसका कुप्रभाव शिशु पर पड़ सकता है। आइये हम आपको बताते हैं कि चंद्र ग्रहण के संभावित कुप्रभाव क्या क्या हो सकते हैं और इससे बचने के लिए गर्भवती महिला को क्या क्या करना चाहिए।
संभावित नुकसान
चन्द्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्ति के प्रभाव से शिशु मानसिक रूप से कमजोर और शिथिल हो सकता है। कई लोग तो ये बताते हैं कि चंद्रग्रहण के दौरान सावधानी ना बरतने की वजह से उनका शिशु मानसिक रूप से विकलांग भी हो गया इसलिए ग्रहण के दौरान कमरे में रहना ही ज्यादा बेहतर है। वेंटिलेशन का अच्छा प्रबंध कर लें किन्तु खिड़की बंद करके रखे तो और बेहतर होगा.
धारदार चीजों का इस्तेमाल
चाक़ू, कील, कैंची, सुई जैसी चीजों का इस्तेमाल ग्रहण के दौरान वर्जित किया गया है। ऐसी मान्यता है कि इन चीजों से नकारात्मक शक्तियां आमंत्रित होती हैं।

खाना-पीना वर्जित
ऐसी मान्यता है कि चंद्रग्रहण के दौरान खाने पीने की चीजो पर बुरा असर पड़ता है। भोजन की नैसर्गिक गुणवत्ता में तबदीली आ जाती है। इसलिए गर्भवती महिला को चंद्रग्रहण के दौरान कुछ खाना पीना नहीं चाहिए। सूतक काल से पहले ही कुछ खा लें या फिर ग्रहण के बाद स्नान करके कुछ खाएं।
सोने से बचें
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिला को सोने की भी मनाही है। ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के दौरान सोने से बच्चा शिथिल हो जाता है और मानसिक विकास रुक जाता है। सलाह दी जाती है कि ग्रहण के दौरान कोई धार्मिक पुस्तक पढ़ें या फिर मंत्रो को सुनें और जगे रहे।
करे ये उपाय
अगर ग्रहण के दौरान मुंह में एक तुलसी का पत्ता रख लिया जाए तो ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। साथ ही अगर ग्रहण के दौरान अपने इष्टदेव का स्मरण करते रहा जाए तो गर्भ में पल रहा शिशु सुरक्षित रहता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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