Latest Updates
-
40 की उम्र में दूसरी बार मां बनीं सोनम कपूर, सोशल मीडिया पर दी खुशखबरी, जानिए बेटा हुआ या बेटी -
घर में छिपकलियों ने मचा रखा है आतंक? भगाने के लिए आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, फिर कभी नहीं दिखेंगी दोबारा -
Rajasthan Diwas 2026 Wishes In Marwari: आ धरती म्हारे राजस्थान री...इन मारवाड़ी मैसेज से अपनों को दें बधाई -
Rajasthan Diwas 2026 Wishes: मरुधरा की रेत...राजस्थान दिवस के मौके पर प्रियजनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 March 2026: सोमवार को महादेव बरसाएंगे इन 4 राशियों पर कृपा, जानें अपना भाग्यफल -
Yoga For Arthritis: गठिया के दर्द से हैं परेशान तो रोज करें ये 5 योगासान, जल्द ही मिलेगी राहत -
फैटी लिवर होने पर भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना झेलने पड़ेंगे गंभीर नुकसान -
March Pradosh Vrat 2026: मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
हाथ से इन 5 चीजों का गिरना है बड़े संकट का संकेत, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? -
School Holiday April 2026: छुट्टियों की भरमार! गुड फ्राइडे से आंबेडकर जयंती तक, देखें अवकाश लिस्ट
Char Dham Yatra 2023: क्यों बद्रीनाथ में नहीं बजाया जाता शंख, जानें इसके पीछे का बड़ा रहस्य
हिन्दू धर्म में चार धाम यात्रा का सबसे बहुत महत्व है। चारधाम यात्रा में भक्त मोक्ष प्राप्त करने के लिए जाते हैं। सनातन धर्म में चार धाम यात्रा के बहुत मायने है, जो देवभूमि में मौजूद है। उत्तराखंड को इसलिए देवभूमि कहते हैं क्योंकि यहां पर चारों धाम मौजूद है। जिनमें शामिल है गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ। केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को खुलेंगे और बद्रीनाथ धाम के कपाट 27 अप्रैल को खुलेंगे। अगर हम बद्रीधाम की बात करें तो ये खास भगवान विष्णु को समर्पित है। भगवान विष्णु के भक्त इस बात को अच्छे से जानते हैं कि उनको शंख की ध्वनि कितनी पसंद है। लेकिन आपको ये बात जानकर हैरत होगी कि चार धामों में से एक धाम बद्रीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता। हिमालय के पाद पर स्थित बद्रीनाथ धाम में शंखनाद नहीं किया जाता है।

शंख ना बजाने के पीछे धार्मिक मान्यताएं-
बद्रीनाथ में शंख ना बजाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं। शास्त्रों के अनुसार, मां लक्ष्मी बद्रीनाथ में ध्यान लगा रही थीं। तभी भगवान विष्णु ने शंखचूर्ण नामक एक राक्षस का वध किया था। लेकिन जीत पर शंखनाद नहीं किया गया क्योंकि माता लक्ष्मी ध्यान में थी, और भगवान विष्णु उनका ध्यान भंग नहीं करना चाहते थे।
बद्रीनाथ मंदिर के नाम में एक रहस्य भी है। पुराणों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ध्यान में मग्न थे, उस वक्त बर्फ गिरने लगी थी, जिसकी वजह से मंदिर पूरा बर्फ से ढक गया। तब मा लक्ष्मी ने बद्री यानि बेर के पेड़ का रूप लिया और भगवान विष्णु पर गिरने वाली बर्फ से बचाव किया।

क्या है इसके पीछे का रहस्य-
बद्रीनाथ में शंख ना बजाने के पीछे कई वैज्ञानिक फैक्टर काम करते हैं। यहां बहुत अधिक ठंड होती है और बर्फ पड़ती रहती है, अगर यहां शंखनाद होगा तो ध्वनि पहाड़ों से टकराकर प्रतिध्वनि पैदा कर देगी, जिससे एवलॉन्च आ सकता है, क्योंकि बर्फ में दरार पड़ने लग जाती है। ये सबसे बड़ा कारण है कि यहां पर आदिकाल से ही शंखनाद नहीं बजाया जाता।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











