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Devshayani Ekadashi: देवशयनी एकादशी का है खास महत्व, श्री कृष्ण भी बता चुके हैं इस व्रत के लाभ
वैसे तो साल में पड़ने वाली 24 एकादशियों का बहुत महत्व है। एकादशी विष्णु भगवान् को प्रिय है और माता लक्ष्मी को विष्णु भगवान् प्रिय हैं इसलिए एकादशी का व्रत करने वालों पर भगवान् विष्णु और लक्ष्मी माता दोनों की कृपा बरसती है।
लेकिन इन सभी एकादशियों में सबसे उत्तम एकादशी मानी जाती है देवशयानी एकादशी। आइये जानते हैं कि देवशयानी एकादशी क्या है और इस दिन का हिंदू धर्म में क्या महत्व है।
देवशयानी एकादशी का महत्त्व

आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। चूंकि यह अषाढ़ महीने में आता है इसलिए इसको आषाढ़ी एकादशी भी कहते हैं। इसे देवशयनी एकादशी इसलिए कहते हैं क्योंकि इस दिन से भगवान् विष्णु क्षीर सागर में शेष नाग पर योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दिन से अगले चार महीने तक विष्णु भगवान सोते हैं इसलिए इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है। चार महीने बाद भगवान विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागते हैं।
देवशयनी एकादशी के दिन भक्त भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना कर कृपा प्राप्त करते हैं। देवशयनी एकादशी को देवपद एकादशी और पद्म एकादशी भी कहा जाता है।
भगवान श्री कृष्ण बता चुके हैं देवशयनी एकादशी का महत्व

महाभारत के दौरान युधिष्ठिर द्वारा पूछे जाने पर भगवान् श्री कृष्ण स्वयं कहते हैं कि देवशयानी एकादशी स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, सब पापों को हरनेवाली एकादशी तिथि है। अगर देवशयानी एकादशी के दिन कमल पुष्पों से भगवान् विष्णु का पूजन किया जाए तो सभी क्लेश दूर होते हैं और ये समझ लेना चाहिए की पूजा करने वाले ने तीनों लोकों और तीनों सनातन देवताओं का पूजन कर लिया।
श्री कृष्ण के अनुसार देवशयानी या 'हरिशयनी एकादशी' के दिन भगवान् का एक रूप राजा बलि के यहां रहता है और दूसरा क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर तब तक शयन करता है, जब तक अगली एकादशी जो कार्तिक में आती है वो आ ना जाये। इस बीच मनुष्य को धर्म के अनुसार आचरण करना चाहिए। जो भक्त एकादशी की रात में जागरण करके भगवान् विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करता है उसके पुण्य की गणना स्वयं ब्रह्मा नहीं कर पाते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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