Latest Updates
-
Harela Wishes In Pahadi Or Hindi: 'जी रया, जागि रया' कहकर अपनों को दें हरेला पर्व की शुभकामनाएं -
रथ यात्रा में सबसे पहले राजा ही क्यों लगाते हैं झाड़ू? जानिए छेरा पहरा की परंपरा -
Jagannath Rath Yatra 2026 Wishes: रथ यात्रा पर शेयर करें भक्तिमय शुभकामना संदेश, मिलेगा प्रभु का आशीर्वाद -
अमरनाथ गुफा में पिघला तो फ्रिज में दिखा 'बाबा बर्फानी' का शिवलिंग? वायरल वीडियो देख लोग रह गए हैरान -
एक कली कच्चा लहसुन खाकर दिन की शुरुआत करती हैं सोहा अली खान, जानें खाली पेट गार्लिक खाने के 5 जबरदस्त फायदे -
पिृत दोष से मुक्ति के लिए आज आषाढ़ अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद -
बार-बार मुंह में हो रहे छालों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ओरल कैंसर, जानें लक्षण -
लड़के-लड़कियों के लिए सबसे मॉडर्न और छोटे 100+ टॉप नाम, यहां देखें अर्थ सहित लिस्ट -
कांवड़ यात्रा कब से होगी शुरू? इस दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, अधूरी रह जाएगी पूजा -
Kriti Sanon ने करवाए अपने अंडे फ्रीज! जानें किस उम्र में ये कराना बेहतर और Egg Freezing फायदे-नुकसान?
Dussehra Aur Vijaydashami: जानिये दशहरा और विजयदशमी के बीच क्या है अंतर?
Dussehra Aur Vijaydashami: पवित्र नवरात्र के नौ दिन माता के अलग अलग रूपों की पूजा जारी है। नौ दिन तक चलने वाले इस त्यौहार का दसवें दिन समापन होता है जिसे दशहरा या विजयदशमी कहते हैं। वैसे देखे तो दोनों त्योहार एक ही जैसे हैं और एक ही दिन यानी दशमी के दिन ही मनाते हैं फिर भी दशहरा और विजयदशमी में थोडा अंतर है।

महिषासुर नामक राक्षस ने जब अपना अत्याचार और प्रकोप बढ़ा दिया तो देवता गण त्राहिमाम कर उठे थे। देवताओं और धर्म की रक्षा के लिए विष्णु और शिव ने मिलकर माता दुर्गा का अवतरण कराया और बाकि के देवताओं ने शक्ति की देवी दुर्गा को अपने अपने अस्त्र शस्त्र दिए। नौ दिन तक माता दुर्गा की उस राक्षस महिषासुर से लड़ाई चली और फिर दसवें दिन माता ने महिषासुर का वध कर दिया। इसलिए दशमी को दशहरा भी कहते हैं और सत्य की असत्य पर विजय को त्यौहार के रूप में मनाते हैं। नौ दिन तक माता की प्रतिमा की पूजा अर्चना करने के पश्चात दशमी को प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है। मुख्य रूप से माता की ज्योत जलाना और पूजा पाठ के बाद इनकी प्रतिमा का विसर्जन ही दशहरा है।

इसी तिथि को यानी दशमी को भगवान् श्री राम ने रावण का वध भी किया था। रावण बहुत शक्तिशाली था और उसे वरदान प्राप्त था कि उसके प्राण उसकी नाभि में होगा और ये बात रावण और उसके भाई विभीषण के अलावा किसी को मालूम नहीं थी। तीनों लोक पर विजय प्राप्त करने वाला रावण अपने अत्याचार के कारण कुख्यात था। ऐसे में विष्णु के अवतार राम ने रावण को उसके अन्य भाइयों सहित मार डाला। धर्मी लोगों को रावण के अत्याचार से मुक्ति मिल गयी। एक सन्देश भी जनमानस को पंहुचा कि आप कितने भी शक्तिशाली हो किन्तु विजय सिर्फ सत्य और धर्म की ही होगी। इसीलिए इस दशमी के दिन को विजयदशमी के रूप में भी मनाते हैं। विजयदशमी के दिन रावण का पुतला दहन करते हैं जो असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। दशहरा में महिषासुर पर माता दुर्गा की विजय का त्योहार मनाते हैं। दशहरा और विजयदशमी के बीच एक बात कॉमन है कि राम ने भी रावण का वध करने से पहले माता दुर्गा की उपासना की थी। इसलिए दोनों ही त्योहारों में माता दुर्गा की पूजा की जाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications