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Kalashtami 2026: कब है साल की पहली कालाष्टमी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान काल भैरव को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन व्रत रखने और भगवान काल भैरव की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को हर तरह के भय, कष्ट, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रुओं, शनि-राहु दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। साल 2026 की पहली कालाष्टमी माघ मास में पड़ रही है, जिसे लेकर लोगों में तारीख को लेकर थोड़ा असमंसज है। ऐसे में, आइए जानते हैं साल 2026 की पहली कालाष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -

2026 की पहली कालाष्टमी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 जनवरी की सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 11 जनवरी रविवार की सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। चूंकि, कालाष्टमी की पूजा निशिता काल यानी अर्धरात्रि के समय की जाती, इसलिए वर्ष 2026 की पहली कालाष्टमी 10 जनवरी, शनीवार को ही मनाई जाएगी। कालाष्टमी की निशिता पूजा का मुहूर्त 10 जनवरी की रात्रि 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक है। इस दिन का अभिजीत मुहूर्त रात 12 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 50 मिनट तक है।
कालाष्टमी का महत्व
भगवान काल भैरव को महाकालेश्वर और 'दंडाधिपति' भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से भय, बाधा, ग्रह दोष या नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही, जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सफलता का वास होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष या शनि ग्रह से संबंधित कोई कष्ट हो, उन्हें कालाष्टमी का व्रत रखने की सलाह दी जाती है। इससे ग्रहों का दुष्प्रभाव कम होता है।
कालाष्टमी पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
इसके बाद 'ॐ कालभैरवाय नमः' मंत्र का जप करते हुए पूजा शुरू करें।
भगवान को पुष्प, अक्षत, नारियल, सिंदूर, सरसों के तेल का दीपक, धूप, नैवेद्य और काले तिल अर्पित करें।
पूरे दिन व्रत रखने के बाद आपको अर्धरात्रि में भगवान काल भैरव की पूजा करनी चाहिए।
कालाष्टमी पर भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए कालभैरवाष्टकम् का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा के अंत में भगवान काल भैरव की आरती करें और उनसे अपनी गलतियों की क्षमा मांगते हुए कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करें।



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