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Guru Nanak Jayanti Quotes: नानक साहब के इन 10 अनमोल वचनों से अपने जीवन की राह बनाएं आसान
Guru Nanak Dev Inspirational Quotes: सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन 15 अप्रैल, 1469 में हुआ था। उन्होंने रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी राय भोई गाँव में श्रीमती तृप्ता देवी की संतान के रूप में जन्म लिया, बाद में इस स्थान को ननकाना साहिब नाम दिया गया।
जीवन में सत्य की खोज की तलाश में जुटे गुरु नानक ने अपने शिष्यों के साथ देश -विदेश की यात्राएं की थी। गुरुनानक ने भारत की चारों दिशाओं में सभी प्रमुख स्थानों की यात्राएं की। इतना ही नहीं, वो ईरान, अफगानिस्तान, अरब और इराक की यात्रा पर भी गए। नानक जी की याद में बगदाद में एक मंदिर का निर्माण हुआ था और उस मंदिर पर तुर्की भाषा में एक शिलालेख लिखा गया था जो अभी भी मौजूद है।

गुरु नानक जी की आध्यात्मिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य वर्तमान समय की सामाजिक ,राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों को समझना था जिसके आधार पर नानक एक नए समाज का निर्माण कर सकें। सिख धर्म में नानक देव जी की यात्रा को उदासियाँ कहा जाता है। आइये गुरु नानक जयंती के पावन अवसर पर नानक साहब के विचारों को एक बार फिर से याद करने और अपने जीवन में उन्हें लागू करने का प्रयास करते हैं।
किरत करो- यानी ईमानदारी से मेहनत कर आजीविका कमाना। श्रम की भावना सिख अवधारणा का भी केंद्र है। इसे स्थापित करने के लिए नानक जी ने एक अमीर जमींदार के शानदार भोजन की तुलना में गरीब के कठिन श्रम के माध्यम से अर्जित मोटे भोजन को प्राथमिकता दी थी।

"वंड शको" - साझा करें और उपभोग करें
गुरु नानक देव जी का मानना था कि जो लोग सक्षम हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे जरूरतमंदों की देखभाल करें। यह हमें साझा करने के महत्व पर एक सबक सिखाता है और कैसे दुनिया को एक बेहतर जगह बनाया जा सकता है यदि हम समग्र रूप से अपने समाज और समुदाय के उत्थान के लिए गतिविधियों में संलग्न हों।
"सेवा" - निःस्वार्थ सेवा
सेवा का विचार सिख धर्म का मूल है। गुरु नानक देव जी निःस्वार्थ सेवा के गुण पर विश्वास करते थे और उसका पालन करते थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि आध्यात्मिक संतुष्टि और सच्ची संतुष्टि केवल उन कार्यों में संलग्न होकर ही प्राप्त की जा सकती है जो प्रकृति में पूरी तरह से निस्वार्थ हैं। देशभर के गुरुद्वारों में आज भी परोसे जाने वाले लंगर के पीछे यही विचार है। इसलिए, अपने लालच को दूर रखें और अपना जीवन जीते समय निस्वार्थ रहें।

ईश्वर सर्वव्यापी है
गुरु नानक देव जी मूर्तिपूजा के पूर्णतः विरोधी थे। उनका मानना था कि ईश्वर प्रकृति में हर जगह मौजूद है और इसलिए ईश्वर से जुड़ने के लिए आपको मूर्तियों या मंदिरों या मस्जिदों की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह देखने के बाद इस विचार पर जोर दिया कि कैसे निचली जातियों को मंदिरों में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। अब यह परिदृश्य कुछ हद तक बदल गया है लेकिन आप जानते हैं कि कैसे ये धार्मिक प्रतीक और मूर्तियाँ अक्सर धार्मिक हिंसा का प्रचार करने का आधार बन जाती हैं। और यह सब हल हो सकता है यदि कोई ईश्वर की सर्वव्यापकता में विश्वास करना शुरू कर दे।

दया और करुणा
गुरु नानक देव जी का मानना था कि केवल दया और करुणा ही दुनिया को सकारात्मक तरीके से प्रभावित और बदल सकती है। अपने कार्यों से, उन्होंने इस विचार में अपना विश्वास साबित कर दिया कि इस दुनिया का प्रत्येक प्राणी, चाहे वह कितना भी बुरा क्यों न हो, अपने साथी प्राणियों से दया का पात्र है और दयालुता किसी व्यक्ति को अच्छाई में बदल सकती है। इसलिए, दुनिया को करुणा की दृष्टि से देखें और देखें कि कैसे आपकी दयालुता दुनिया को सकारात्मक दिशा में ले जा सकती है।

प्रत्येक जीवन का एक उद्देश्य पूरा करना होता है
उनका मानना था कि दुनिया और उसके सभी निवासियों के निर्माण के पीछे ईश्वर का एक स्पष्ट उद्देश्य था। यदि आप दुनिया को इस तरह से देखते हैं, तो आपके जीवन में जो भी अस्तित्वगत दुविधाएं आप महसूस करते हैं, उन्हें सकारात्मक और उत्पादक में बदला जा सकता है।

समानता
गुरु नानक देव जी इस विचार में दृढ़ विश्वास रखते थे कि भगवान ने सभी को एक समान बनाया है और इसलिए सभी को उनकी जाति, धर्म और लिंग की परवाह किए बिना एक समान माना जाना चाहिए। यदि हर कोई केवल इस एक पाठ को अपने जीवन में शामिल कर ले तो दुनिया एक बेहतर जगह बन जाएगी और दुनिया आज जिन समस्याओं का सामना कर रही है उनमें से अधिकांश अपने आप ही हल हो जाएंगी।

गुरु नानक देव जी के दस सिद्धांत :
1.ईश्वर एक है।
2.सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो।
3.जगत का कर्ता सब जगत और सब प्राणी मात्र में मौजूद है।
4.सर्वशक्तिमान ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता।
5. ईमानदारी से मेहनत करके उदरपूर्ति करना चाहिये।
6.बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएँ।
7.सदा प्रसन्न रहना चाहिए, ईश्वर से सदा अपने को क्षमाशीलता मांगना चाहिये।
8.मेहनत और ईमानदारी से कमाई करके उसमें से ज़रूरतमंद को भी कुछ अंश देना चाहिये।
9.सभी स्त्री और पुरूष बराबर हैं।
10.भोजन शरीर को जिंदा रखने के लिये जरूरी है, पर लोभ -लालच व संग्रहवृत्ति बुरी है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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