Happy Paryushan Parva 2025 Wishes : अहिंसा और संयम का संदेश देता है पर्युषण पर्व, अपनों को भेजें शुभकामनाएं

Happy Paryushan Parva 2025 Wishes : जैन धर्म में पर्युषण पर्व का अत्यंत महत्व है। यह पर्व हर साल भाद्रपद मास में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसे आत्मशुद्धि, संयम और क्षमा का पर्व माना जाता है। पर्युषण कुल 18 दिनों का होता है, जिसमें श्वेतांबर समुदाय 8 दिन और दिगंबर समुदाय 10 दिन इस पर्व को मानते हैं। श्वेतांबर परंपरा में पर्युषण पर्व समाप्त होने के बाद दिगंबर संप्रदाय का दशलक्षण पर्व प्रारंभ होता है।

पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में श्वेतांबर समुदाय के लोग पर्युषण पर्व 21 अगस्त से 28 अगस्त 2025 तक मनाएंगे, जबकि दिगंबर संप्रदाय के लोग इसे 28 अगस्त से 6 सितंबर 2025 तक मनाएंगे। इस दौरान श्रद्धालु उपवास, स्वाध्याय, प्रार्थना और क्षमा-याचना जैसे अनुष्ठान करते हैं। पर्युषण पर्व हमें सत्य, अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम का संदेश देता है तथा जीवन को शुद्ध और पवित्र बनाने की प्रेरणा प्रदान करता है।

Happy Paryushan Parva 2025 Wishes

पर्युषण पर्व जैन धर्म के अहिंसा, सत्य और आत्म-संयम के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का अवसर देता है। यह पर्व आत्मशुद्धि, क्षमा और करुणा का संदेश देता है। इस पावन अवसर पर अपने प्रियजनों संग शुभकामनाएं शेयर करें।

Happy Paryushan Parv 2025 Wishes and Quotes in Hindi

1. संसार है बहुत छोटा पर हर पग पर गलतियां हैं बहुत....
जाने- अनजाने हुई गलतियों से आपको अगर दुखी किया हो
तो क्षमा का विनम्र निवेदन करें... मिच्छामि दुक्कदम!!!

2. फूल कभी दो बार नहीं खिलता
जन्म कभी दो बार नहीं मिलता
यूं मिलाने को मिल जाते है जनम हजारों
मगर जैन धर्म बार-बार नहीं मिलता
पर्युषण पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

3. नवकार मेरी सांस है
जैन धर्म मेरा विश्वास है
गुरुदेव मेरे प्राण है
मोक्ष कि मुझे तलाश है
शुभ पर्युषण पर्व

4. पर्युषण पुरुषार्थ का पर्व है
दुसरे पर्व भोग के पर्व हैं
यह त्याग का पर्व है
मन से, वचन से और काय से त्यागने का पर्व
सब मिलजुल कर इसे मनाएं
पर्युषण पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं


Happy Paryushan Parv 2025 Wishes and Messages in Hindi

5. ये पर्व हमारे मन की शुद्धता का
अहिंसा के मार्ग पर चलने का
राग द्वेष मिटाने का और
धर्म के मार्ग पर चलने का
जय जिनेन्द्र
पर्युषण पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

6. पर्युषण का आगमन है,
धर्म ध्यान की रुत है,
धर्म करो कर्म को तोड़ो,
यही संदेश दुनिया को दो,
"जीओ और जीने दो"
अहिंसा परमो धर्म
जय जिनेन्द्र

7. आत्मा को परमात्मा बनाने का,
राग पर विराग की विजय का तथा
अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का महापर्व है

8. पैसे की हवस ने आज के आदमी को अंधा बना दिया है.
यह पर्व आदमी को सिखाता है कि जीवन में पैसा 'कुछ' हो सकता है,
'बहुत कुछ' भी हो सकता है लेकिन
'सब कुछ' नहीं हो सकता।

9. जीवन की असली सुंदरता बाहर की दौलत में नहीं, भीतर की शांति में है।
रिश्तों का असली सौंदर्य क्रोध और मनमुटाव मिटाकर क्षमा माँगने में है।
और आत्मा की असली शक्ति संयम, तप व करुणा में है।

Story first published: Wednesday, August 20, 2025, 11:43 [IST]
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