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Harela 2026: 7 या 8 जुलाई, कब बोया जाएगा हरेला? जानें सही तिथि-विधि और इस दिन को मनाने का महत्व
Harela 2026 Kab Boya Jayega: देवभूमि उत्तराखंड में हरेला एक ऐसा त्योहार है जो हर साल जुलाई के महीने में मनाया जाता है। अब इस दिन को मनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। ये त्योहार हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और अच्छी फसल की कामना के रूप में मनाया जाता है। हर साल कर्क संक्रांति के दिन हरेले का पूजन किया जाता है तो ऐसे में कई बार इसे बोने की तिथि आगे-पीछे होजाती है। अगर आप भी कंफ्यूज हैं कि इस साल कब और किस शुभ मुहूर्त में हरेले के बीज बोए जाने हैं तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है।

कब बोया जाएगा हरेला?
इस साल हरेला बोने की सही तिथि है 7 जुलाई 2026, दिन मंगलवार है। आप रात्रि में हरेला बोएं। इसके लिए पहले आप साफ मिट्टी लें और उसे गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। इसके बाद मां-पार्वती और भगवान शिव का नाम लें और पूजन करें। अब आप अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर हरेला बोएं। ऐसा माना जाता है कि पूरा परिवार मिलकर ये काम करता है तो सुख-समृद्धि और उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
हरेला बोने के लिए क्या-क्या आवश्यक है?
आपने ये तो जान लिया कि हरेला कब बोना है और इसका पूजन कब होगा? लेकिन ये जानना तो बाकी है कि इसे बोने के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता पड़ती है। हरेला बोने के लिए आपको साफ मिट्टी या रेता, एक पात्र चाहे वो मिट्टी का हो या फिर थाली हो। गांव में तो मिठाई के डिब्बों में भी हरेला बोया जाता है। इसके अलावा, धान, गेहूं, जौ, मक्का, पीली सरसों, गहत की दाल, उड़द की साबूत दाल आदि बोए जाते हैं। इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर आप मिट्टी में डालें और फिर ऊपर से पानी छिड़क दें।

हरेला बोते व काटते समय गाए जाते हैं लोकगीत
पहाड़ों में हरेला बोते व काटते समय महिलाओं द्वारा शकुनआखर जिन्हें आसान भाषा में लोकगीत कहा जाता है गाए जाते हैं। महिलाएं इस दौरान इन लोकगीतों के माध्यम से देश और लोगों की उन्नति और समृद्धि की कामना करती है। साथ ही अच्छी फसल की कामना की जाती है ताकि खेती पर निर्भर लोगों का साल अच्छे से बीते और देश में अनाज की कमी न हो।
कैसे किया जाता है हरेला पूजन?
हरेले को बोने कि तिथि और विधि के बारे में जानने के बाद ये भी जान लेते हैं इसका 10 दिन बाद इसका पूजन कैसे किया जाता है। दरअसल, 10वें दिन हरेला की पूजा की जाती है और फिर उसे दरात या चाकू की सहायता से काटा जाता है। फिर भगवानों को हरेला अर्पित किया जाता है और इसके बाद घर के बड़े बच्चों व अन्य परिवार वालों के सिर पर हरेला रखते हैं। यही नहीं अनाज के इन पत्तों को दरवाजों पर भी लगाया जाता है ताकि पूरे साल घर में अन्न-धन के भंडार भरे रहें।



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