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Shardiya Navratri 2025: कब है अष्टमी और नवमी? जानें कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
Kab Hai Ashtami Or Navami: इस बार शारदीय नवरात्रि बहुत खास हैं क्योंकि इस बार 9 नहीं बल्कि 10 दिन के व्रत रखे जा रहे हैं। पूरे 10 दिन तक माता रानी की पूजा होगी और 11वें दिन विजयदशमी है। पूरे देश में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व माता रानी की भक्ति और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं। इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है क्योंकि इन्हीं दिनों पर कन्या पूजन और हवन का विधान है। मान्यता है कि इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं के रूप में मां दुर्गा की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
अब इस बार नवरात्रि के 10 दिन होने की वजह से लोगों को अष्टमी और नवमी को लेकर कंफ्यूजन है कि किस दिन अष्टमी का कन्या पूजन होगा और किस दिन नवमी का कन्या पूजन होगा। आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि 2025 में अष्टमी और नवमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।

कन्या पूजन का महत्व
हिंदू धर्म में कन्या पूजन को विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि कन्याओं में मां दुर्गा का वास होता है। नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर 9 कन्याओं को भोजन कराना, उनके चरण धोना और उपहार देना माता रानी को प्रसन्न करता है। ऐसा करने से घर में धन, सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।
कब है अष्टमी और नवमी?
इस बार नवरात्रि बहुत खास हैं क्योंकि इस बार 9 दिन के नहीं बल्कि 10 दिन के नवरात्रि व्रत हैं। इस वजह से लोगों को अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर कंफ्यूजन है। पंचांग के अनुसार, 29 सितंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट से 30 सितंबर की शाम 6 बजकर 6 मिनट तक अष्टमी तिथि है। ऐसे में आप 29 सितंबर की शाम से लेकर 30 सितंबर की शाम तक कन्या पूजन कर सकते हैं। मगर शुभ मुहूर्त 30 सितंबर को है क्योंकि उदया तिथि पर ही अष्टमी कन्या पूजन किया जाना शुभ रहेगा। ऐसा ही नवमी तिथि के साथ है। नवमी तिथि 30 सितंबर शाम को 6 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी जो 1 अक्टूबर शाम 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 1 अक्टूबर को नवमी का कन्या पूजन किया जाएगा।
कन्या पूजन विधि
सुबह स्नान कर घर को शुद्ध करें और माता रानी की पूजा करें।
9 या 8 कन्याओं और एक छोटे बालक (लंगूर) को बुलाएं।
उनके चरण धोकर उन्हें लाल चुनरी, बिंदी और फूल अर्पित करें।
पूरी, हलवा, चने और फल का प्रसाद खिलाएं।
अंत में उन्हें दक्षिणा और उपहार देकर विदा करें।



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