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Krishna Ji Ki Aarti: जन्माष्टमी पर गाएं श्रीकृष्ण की आरती, पढ़ें आरती कुंज बिहारी की लिरिक्स यहां
Krishna Ji Ki Aarti : हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत शुभ और पावन माना जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं, जिन्होंने पृथ्वी पर अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया था। उनकी लीलाएं और शिक्षाएं आज भी लोगों के जीवन को दिशा देती हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की रात को देशभर के मंदिरों में भव्य झांकी, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन होता है। भक्तजन उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाते हैं।
इस वर्ष जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025, शनिवार को मनाई जा रही है। इस दिन श्रद्धालु व्रत-पूजन करके कान्हा की आरती उतारते हैं। आरती को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि यह भक्त और भगवान के बीच प्रेम और भक्ति का अद्भुत मिलन है।

श्रीकृष्ण जी की आरती
॥ आरती कुंजबिहारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ॥
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली,
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा।
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्री बनवारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू,
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
श्री राधा रानी जी की आरती
॥ आरती श्री राधा रानी जी की ॥
आरती राधाजी की कीजै।
कृष्ण संग जो कर निवासा,
कृष्ण करे जिन पर विश्वासा ॥
आरती वृषभानु लली की कीजै।
कृष्णचन्द्र की करी सहाई,
मुंह में आनि रूप दिखाई।
उस शक्ति की आरती कीजै ॥
नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई,
यमुना तट पर रास रचाई।
आरती रास रसाई की कीजै ॥
प्रेम राह जिनसे बतलाई,
निर्गुण भक्ति नहीं अपनाई।
आरती राधाजी की कीजै ॥
दुनिया की जो रक्षा करती,
भक्तजनों के दुख सब हरती।
आरती दुख हरणीजी की कीजै ॥
दुनिया की जो जननी कहावे,
निज पुत्रों की धीर बंधावे।
आरती जगत माता की कीजै ॥
निज पुत्रों के काज संवारे,
रनवीरा के कष्ट निवारे।
आरती विश्वमाता की कीजै ॥



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