Latest Updates
-
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व
Mahakumbh 2025: प्रयागराज में मौजूद हैं ये प्राचीन मंदिर, जरूर करें इनके दर्शन
Mahakumbh 2025: महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की भीड़ प्रयागराज (प्रयाग) में संगम के पवित्र स्नान के लिए उमड़ेगी। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र है, बल्कि प्रयागराज के प्राचीन और भव्य मंदिरों का दर्शन करने का भी एक सुनहरा अवसर है।
इन मंदिरों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है और यह श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र हैं। आइए जानते हैं, महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के प्रमुख मंदिरों के बारे में।

1. हनुमान मंदिर (बड़े हनुमान जी)
- स्थान: संगम क्षेत्र के पास
- विशेषता: इस मंदिर में भगवान हनुमान जी की विशाल लेटी हुई मूर्ति है। यह देश में अपनी तरह का अनोखा मंदिर है।
- धार्मिक मान्यता: कहा जाता है कि गंगा का जल स्तर बढ़ने पर हनुमान जी की मूर्ति डूब जाती है और फिर जलस्तर अपने आप घट जाता है।
- महत्व: महाकुंभ के दौरान संगम स्नान के बाद यहां दर्शन करना शुभ माना जाता है।
2. पातालपुरी मंदिर और अक्षयवट
- स्थान: इलाहाबाद किले के पास
- विशेषता: यह मंदिर भूमिगत है और इसे प्राचीन काल का माना जाता है।
- धार्मिक मान्यता: कहा जाता है कि यहां भगवान राम, ऋषि दुर्वासा और अन्य देवताओं ने तपस्या की थी।
- अक्षयवट: यह एक दिव्य बरगद का पेड़ है, जिसे अमर और अटूट आस्था का प्रतीक माना जाता है।
3. श्री वेणीमाधव मंदिर
- स्थान: दरागंज क्षेत्र
- विशेषता: भगवान विष्णु के 12 प्राचीन स्वरूपों में से एक माने जाते हैं।
- धार्मिक मान्यता: यह मंदिर संगम क्षेत्र के पास स्थित 12 वेणीमाधव मंदिरों का सबसे प्रमुख मंदिर है।
- महत्व: भक्त यहां आकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद लेते हैं, जिससे उन्हें मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
4. शिव कुटी मंदिर
- स्थान: संगम से कुछ दूरी पर
- विशेषता: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और घनी हरियाली के बीच स्थित है।
- धार्मिक मान्यता: माना जाता है कि यहां भगवान शिव ने स्वयं आकर भक्तों को आशीर्वाद दिया था।
- महत्व: काशी और प्रयाग में शिव के दर्शन को बेहद शुभ माना गया है।
5. अलोपशंकरी देवी मंदिर
- स्थान: अलोपीबाग क्षेत्र
- विशेषता: यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां देवी की मूर्ति के स्थान पर एक झूला पूजनीय है।
- धार्मिक मान्यता: कहा जाता है कि यहां माता सती के शरीर का अंतिम भाग गिरा था।
- महत्व: महाकुंभ में देवी की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
6. ललिता देवी मंदिर
- स्थान: महात्मा गांधी मार्ग पर
- विशेषता: यह मंदिर मां ललिता देवी को समर्पित है, जिन्हें प्रयागराज की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
- धार्मिक मान्यता: कहा जाता है कि यहां माता सती के अंग गिरे थे।
- महत्व: यहां पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
7. मनकामेश्वर मंदिर
- स्थान: संगम तट के पास
- विशेषता: भगवान शिव का प्राचीन मंदिर, जो कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं का बड़ा केंद्र है।
- धार्मिक मान्यता: यहां भगवान शिव के दर्शन से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
8. भारद्वाज आश्रम
- स्थान: प्रयागराज शहर
- विशेषता: यह ऋषि भारद्वाज का तपस्थल है और इसे महर्षि का प्राचीन आश्रम माना जाता है।
- धार्मिक मान्यता: यह स्थान महाभारत और रामायण काल से जुड़ा हुआ है।
- महत्व: यहां आकर ध्यान और प्रार्थना करने से मानसिक शांति मिलती है।
9. इस्कॉन मंदिर
- स्थान: कटरा क्षेत्र
- विशेषता: भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को समर्पित यह मंदिर भक्तों को भक्ति रस में डुबो देता है।
- धार्मिक मान्यता: भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से मन और आत्मा को शांति मिलती है।
महाकुंभ यात्रा का महत्व
महाकुंभ न केवल संगम स्नान का अवसर है, बल्कि यह प्रयागराज के प्राचीन मंदिरों का दर्शन कर आस्था को मजबूत करने का भी समय है। इन मंदिरों में दर्शन करने से न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है, बल्कि इनकी ऐतिहासिक धरोहर भी मन को शांति और गर्व का अनुभव कराती है।
महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज के इन प्रमुख मंदिरों का दर्शन अवश्य करें और अपनी यात्रा को और भी खास बनाएं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications