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Ravi Pradosh Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है रवि प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और शिव आरती
Ravi Pradosh Vrat Katha OR Shiv Aarti In Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस व्रत में भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है। बता दें कि शिव के भक्तों ने आज यानी 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत रखा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से व्रत रखने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। रविवार को पड़ने वाले इस व्रत को प्रदोष व्रत कहा जाता है जो एक अच्छा संयोग माना जाता है। क्योंकि इस दिन भगवान शंकर के साथ सूर्य देवता की भी पूजा की जाती है जिससे व्रत करने वाले का सूर्य के समान तेज और यश हो। तो चलिए आज इस शुभ दिन पर जानते हैं पूजा विधि से लेकर शुभ मुहूर्त और कथा तक सब कुछ।

रवि प्रदोष व्रत में पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई को सुबह 2: 04 मिनट से शुरू होगी जो रात 10:29 मिनट तक रहेगी। ऐसे में जुलाई का पहला प्रदोष व्रत आज रखा गया है। शुभ मुहूर्त की बात करें तो शाम 7:22 मिनट से लेकर 9:24 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होंगे और आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।
क्या है रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि?
रवि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान आदि कर स्वच्छ कपड़ें पहनें।
भगवान शिव के व्रत का संकल्प ले शिव चालीसा का पाठ करें और आरती करें।
शुभ मुहूर्त में पूजा के लिए जरूरी सामान जैसे कि बेलपत्र, शहद, घी, धतूरा, बेलपत्र, फूल, सुपारी, लौंग, इलायची. अखंडित चावल, और गंगा जल रखें।
शाम के समय प्रदोष काल में शिव चालीसा का पाठ करने के बाद शिव मंत्र आदि का जाप करें और मन ही मन भगवान शिव से अपनी मनोकामना कहें और विधि-विधान से पूजा करें।

रवि प्रदोष व्रत की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार रहता था। परिवार में ब्राह्मण, उसकी पत्नी और एक पुत्र था। वे भगवान शिव के परम भक्त थे और प्रत्येक प्रदोष व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करते थे। एक दिन उनका पुत्र किसी कार्य से जंगल गया। रास्ते में उसे कुछ डाकुओं ने पकड़ लिया और उस पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर राजा के सैनिकों के हवाले कर दिया। बिना पूरी जांच किए राजा ने उसे कारागार में डाल दिया। उधर घर पर माता-पिता अत्यंत दुखी हुए। उस दिन संयोग से रविवार का प्रदोष व्रत था। उन्होंने पूरे विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की, प्रदोष व्रत की कथा सुनी और अपने पुत्र की कुशलता के लिए प्रार्थना की।
भगवान शिव की कृपा से उसी रात राजा को स्वप्न में दर्शन हुए। उन्होंने कहा कि जिस युवक को कैद किया गया है, वह निर्दोष है। यदि उसे तुरंत मुक्त नहीं किया गया तो राज्य पर संकट आ जाएगा। सुबह होते ही राजा ने जांच कराई तो युवक निर्दोष निकला। राजा ने उससे क्षमा मांगी, उसे सम्मानपूर्वक मुक्त किया और धन-संपत्ति देकर विदा किया। जब युवक सकुशल घर लौटा तो पूरा परिवार भगवान शिव की महिमा का गुणगान करने लगा। तभी से ऐसी मान्यता है कि जो श्रद्धालु रवि प्रदोष व्रत को श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक करता है, भगवान शिव उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, संकटों का नाश करते हैं तथा सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।ॉ
भगवान शिव जी की संपूर्ण आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर में श्रेष्ठ कमंडलु चक्र त्रिशूल धारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्य ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
॥ इति श्री शिव आरती सम्पूर्ण ॥



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