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Shani Jayanti 2026: 15 या 16 मई, कब मनाई जाएगी शनि जयंती? जानें सही तिथि और उपाय
Shani Jayanti 2026: ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता और कर्मफल दाता कहे जाने वाले शनि देव का जन्मोत्सव हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं, इसलिए शनि जयंती का दिन उनके क्रोध को शांत करने और कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। साल 2026 में शनि जयंती की तारीख को लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है। चूंकि इस बार अमावस्या तिथि दो दिनों में विभाजित है, इसलिए उदया तिथि और शनि अमावस्या के विशेष संयोग ने इस दिन के महत्व को और बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं शनि जयंती की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और दोष मुक्ति के अचूक उपाय।

क्यों मनाई जाती है शनि जयंति?
पौराणिक कथा के अनुसार, शनि जयंती भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया के पुत्र शनि देव के जन्म के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। मान्यता है कि माता छाया ने गर्भावस्था के दौरान भगवान शिव की इतनी कठोर तपस्या की थी कि उनके तप के तेज और धूप के प्रभाव से गर्भ में पल रहे बालक शनि का रंग काला हो गया, जिसे देख पिता सूर्य देव ने उन्हें अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया था। पिता के इस अपमान से आहत होकर शनि देव ने महादेव की आराधना की, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें ब्रह्मांड के 'न्यायकर्ता' और 'कर्मफल दाता' के रूप में प्रतिष्ठित किया। आज के दिन भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं ताकि वे अपने कर्मों के दोषों से मुक्ति पा सकें और शनि देव की न्यायप्रिय दृष्टि का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।
कब है शनि जयंती 2026? जानें सही तारीख और मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, तिथि की गणना सूर्योदय के समय से की जाती है। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है:
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई 2026, सुबह 05:11 बजे से।
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई 2026, रात 01:30 बजे तक।
क्योंकि अमावस्या तिथि 16 मई को सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 16 मई 2026, शनिवार को ही मनाई जाएगी। खास बात यह है कि शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसे 'शनि अमावस्या' का भी महासंयोग माना जा रहा है।
शनि जयंती 2026 पूजा विधि (Shani Jayanti 2026 Puja Vidhi)
शनि देव की पूजा के लिए शाम (प्रदोष काल) का समय सबसे शुभ माना जाता है।
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनें।
पश्चिम दिशा: पूजा के दौरान अपना मुख पश्चिम दिशा की ओर रखें।
मंत्र जाप: शनि देव की आरती करें और उनके बीज मंत्र "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" का कम से कम 108 बार जाप करें।
हनुमान चालीसा: शनि दोष से बचने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ भी इस दिन अत्यंत फलदायी रहता है।न
शनि दोष से मुक्ति के लिए जरूर करें ये 3 उपाय
यदि आप शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कुंडली में शनि दोष से परेशान हैं, तो 16 मई को ये 3 उपाय आपके कष्टों को कम कर सकते हैं।
पीपल के वृक्ष के नीचे दीपदान: शनि जयंती की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। पीपल में भगवान विष्णु और शनि देव का वास माना जाता है, ऐसा करने से मानसिक शांति और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
काले तिल और तेल का अभिषेक: इस दिन शनि देव की मूर्ति पर सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें। तेल चढ़ाने से शनि देव का क्रोध शांत होता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में सुधार आता है।
छाया दान और काला अन्न दान: एक कांसे या लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को दान कर दें। साथ ही जरूरतमंदों को काली उड़द की दाल, काला कपड़ा या जूते-चप्पल दान करने से शनि देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।



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