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Navratri Day 3: आज का दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित, जानें पूजा विधि, भोग, मंत्र व आरती
Navratri Day 3: नवरात्रि के पर्व की खूबसूरत और भक्तिमय शुरुआत हो चुकी है। देश के कोने कोने में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापना के साथ ही नवरात्रि का प्रारम्भ हुआ। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग अलग रूपों की अराधना की जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघटा की पूजा की जाती है।
15 अक्टूबर से नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है और 17 अक्टूबर को तृतीय तिथि मनाई जायेगी। मां चन्द्रघटा अपने मुकुट पर अर्ध चंद्रमा को धारण करती है। मां चन्द्रघटा की उपासना से शक्ति और साहस की प्राप्ति होती है। जानते हैं मां चन्द्र घटा की पूजा विधि, पूजा मंत्र, भोग और आरती के बारे में विस्तार से-

मां चन्द्रघटा पूजन विधि
तृतीया तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा घर की साफ़ सफाई करके गंगाजल छिडकें। जहां कलश स्थापित किया गया है वहाँ चन्द्र घटा माता की तस्वीर स्थापित करें। उनपर अक्षत और तिलक लगाएं। मां की तस्वीर के सामने दीपक और धुप जलाएं और आरती व मन्त्र का उच्चारण करें। मां के मन्त्रों के जाप से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भूरे रंग के वस्त्र पहन कर पूजा करनी चाहिए। 17 अक्टूबर को अभिजित मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से 12:29 बजे से अभिजित मुहूर्त होगा, जिसमें पूजा करना शुभ होगा।
मां चन्द्रघटा का भोग
मां चन्द्रघटा को दूध से बनी चीज़ों का भोग लगाया जाता है। दूध से बनी मिठाई, खीर को माता के भोग में चढ़ा सकते हैं।
मां चंद्रघटा पूजा मंत्र

"पिण्डजप्रवरारूढ़ा ण्डकोपास्त्रकेर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:।।"
"ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥"
"पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥"
चन्द्रघटा आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
चंद्र तेज किरणों में समाती।
क्रोध को शांत करने वाली।
मीठे बोल सिखाने वाली।
मन की मालक मन भाती हो।
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।
सुंदर भाव को लाने वाली।
हर संकट मे बचाने वाली।
हर बुधवार जो तुझे ध्याये।
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं।
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं।
शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगदाता।
कांची पुर स्थान तुम्हारा।
करनाटिका में मान तुम्हारा।
नाम तेरा रटू महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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