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Navratri Day 4: नवरात्रि का चौथा दिन आज, जानें मां कुष्मांडा की पूजा की विधि, भोग, मंत्र व आरती
Navratri Day 4: मां दुर्गा की अराधना का पर्व नवरात्रि धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष 15 अक्टूबर से शुरू हुआ शारदीय नवरात्रि का त्यौहार शुरू हुआ जो 23 अक्टूबर तक चलने वाला है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों का पूजन किया जाता है और उनसे सुख, शांति, साहस और शक्ति की प्रार्थना की जाती है।
नवरात्रि के चौथे दिन कुष्मांडा माता की पूजा की जाती है। कुष्मांडा मां को ऊर्जा की देवी कहा जाता है। मान्यता अनुसार जब सृष्टि में चारों तरफ अन्धकार था तब मां दुर्गा में इस रूप में प्रकट होकर ब्रह्माण्ड में प्रकाश को फैलाया था। जानते हैं 18 अक्टूबर को नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजन विधि, पूजा मन्त्र, आरती और भोग के बारे में विस्तार से -

मां कुष्मांडा पूजन विधि
18 अक्टूबर को चतुर्थी के दिन सुबह सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद माता कुष्मांडा का ध्यान लगाकर दिन की शुरुआत करें। पहले दिन जिस स्थल पर कलश की स्थापना की गई थी वहीं पर माता कुष्मांडा की तस्वीर को लाल कपडे के ऊपर स्थापित करें। माता पर कुमकुम और अक्षत लगाएं। इसके बाद तस्वीर के सामने दीपक और धुप जलाएं और मां की पूजा करें। पूजा में मंत्र और आरती का पाठ करें। इसके साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ भी ज़रूर करें।
कुष्मांडा माता का भोग
भोग के लिए मां कुष्मांडा को हरे रंग की चीज़ें चढ़ाएं, जैसे पान का पत्ता, या हरे फल। इसके साथ ही माता कुष्मांडा को मालपुए का भोग ज़रूर लगाएं। मालपुए के भोग से माता प्रसन्न होगी और सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं।

मां कुष्मांडा पूजा मंत्र
"ऐं ह्री देव्यै नम: वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥"
"ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडा नम:"
"या देवी सर्वभूतेषु
मां कूष्मांडा रूपेण प्रतिष्ठितता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै:
नमस्तस्यै नमो नम:"
मां कुष्मांडा आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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